ये कहानी है हज़रत मूसा (अ.स.) की… एक ऐसे नबी की, जिन्हें अल्लाह ने ज़ुल्म के सबसे बड़े निज़ाम के खिलाफ खड़ा किया। मिस्र का बादशाह फिरऔन… जो खुद को खुदा कहता था… क़ुरआन में आता है: "अना रब्बुकुमुल अ'ला" यानी “मैं तुम्हारा सबसे बड़ा रब हूँ” (सूरह अन-नाज़िआत) बनी इस्राईल… एक मज़लूम क़ौम… जिन्हें गुलाम बना लिया गया था… उनके बेटों को मार दिया जाता… और औरतों को ज़िंदा छोड़ दिया जाता… फिर अल्लाह ने हज़रत मूसा (अ.स.) को भेजा… हक़ के पैग़ाम के साथ… और बड़े-बड़े मौजिज़ों के साथ… हज़रत मूसा (अ.स.) फिरऔन के दरबार में जाते हैं… बिल्कुल बेख़ौफ़… वो कहते हैं: “बनी इस्राईल को आज़ाद कर दो… और एक अल्लाह की इबादत करो।” फिरऔन हंसता है… उसे ये बात मज़ाक लगती है… तभी हज़रत मूसा (अ.स.) अपनी लाठी ज़मीन पर डालते हैं… और वो एक ज़िंदा अजगर बन जाती है… पूरा दरबार हिल जाता है… लेकिन फिरऔन का गुरूर नहीं टूटता… इस मौजिज़े का ज़िक्र क़ुरआन में सूरह अल-आराफ़ में मिलता है… फिरऔन अपनी ताकत दिखाने के लिए जादूगरों को बुलाता है… एक बड़ा मैदान तैयार होता है… जादूगर अपनी रस्सियां फेंकते हैं… और वो सांपों की तरह लगती हैं… लेकिन फिर… हज़रत मूसा (अ.स.) अपनी लाठी डालते हैं… और वो सब कुछ निगल जाती है… ये देखकर जादूगर तुरंत सजदे में गिर जाते हैं… और कहते हैं: “हम ईमान लाए मूसा और हारून (अ.स.) के रब पर।” इस वाक़िए का ज़िक्र क़ुरआन की सूरह ताहा में मिलता है… आख़िरकार अल्लाह हज़रत मूसा (अ.स.) को हुक्म देता है: “रात के वक़्त अपनी क़ौम को लेकर निकल जाओ।” ये हुक्म सूरह अश-शुअरा में बयान हुआ है… रात का अंधेरा… खामोशी… और एक उम्मीद… बनी इस्राईल चुपचाप निकल पड़ते हैं… लेकिन फिरऔन को खबर हो जाती है… वो अपने बड़े लश्कर के साथ पीछा करता है… सुबह होती है… बनी इस्राईल समंदर के किनारे पहुँच जाते हैं… सामने पानी… पीछे दुश्मन… लोग डर जाते हैं… वो कहते हैं: “अब तो हम पकड़े जाएंगे!” लेकिन हज़रत मूसा (अ.स.) कहते हैं: “हरगिज़ नहीं! मेरा रब मेरे साथ है, वो रास्ता ज़रूर दिखाएगा।” ये जुमला क़ुरआन में सूरह अश-शुअरा में आता है… फिर वो लम्हा आता है… अल्लाह का हुक्म आता है: “अपनी लाठी समंदर पर मारो।” हज़रत मूसा (अ.स.) लाठी मारते हैं… और अचानक… समंदर दो हिस्सों में बंट जाता है… पानी दीवारों की तरह खड़ा हो जाता है… और बीच में सूखा रास्ता बन जाता है… क़ुरआन में सूरह अश-शुअरा में आता है: “फनफ़लक फ़काना कुल्लु फ़िर्किन कत्तौदिल अज़ीम” यानी हर हिस्सा बड़े पहाड़ की तरह हो गया… बनी इस्राईल उस रास्ते से गुजरते हैं… फिरऔन भी अपने गुरूर में उसी रास्ते पर उतरता है… लेकिन जैसे ही वो बीच में पहुँचता है… पानी वापस आ जाता है… और फिरऔन… अपने पूरे लश्कर के साथ डूब जाता है… ये सिर्फ एक मौजिज़ा नहीं था… ये यक़ीन की ताकत थी… फिरऔन… जो खुद को खुदा कहता था… आज एक सबक बन गया… और हज़रत मूसा (अ.स.)… एक सच्चे नबी… जिन्होंने अल्लाह पर पूरा भरोसा किया… क़ुरआन की सूरह यूनुस में आता है कि डूबते वक्त फिरऔन ने ईमान लाने की कोशिश की… लेकिन बहुत देर हो चुकी थी… ये कहानी हमें सिखाती है: ✔ जब हालात नामुमकिन लगें… तो भी अल्लाह पर भरोसा रखो ✔ ज़ुल्म चाहे कितना भी ताकतवर हो… आख़िरकार खत्म हो जाता है ✔ सच्चा ईमान… हमेशा रास्ता बना देता है आज भी… अगर हम मुश्किल में हों… तो याद रखें… समंदर आज भी अल्लाह के हुक्म का मोहताज है… और रास्ते आज भी बन सकते हैं…