दोस्तों आज हम एक बहुत ही जबरदस्त साइको क्राइम थ्रोर मूवी देखने वाले हैं। इस कहानी में सिद्धार्थ नाम के एक वकील की जिंदगी एक पल में ही बिखर जाती है। वह सब कुछ खो देता है और उसे सबसे बड़ा झटका तब लगता है जब उसकी पत्नी अचानक कहीं लापता हो जाती है। हालात इतने खराब हो जाते हैं कि खुद सिद्धार्थ पर ही शक किया जाता है और पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेती है। लेकिन कहानी यहीं पर खत्म नहीं होती है। सच जानने की कोशिश में सिद्धार्थ ऐसे अंधेरे राज तक पहुंचता है जिनका संबंध सिर्फ उसकी जिंदगी से नहीं बल्कि पूरे समाज में पहले अंधकारों और कमजोरियों से है हर नया सुराग उसे एक बड़े खतरे की तरफ ले जाता है। जिन लोगों पर भरोसा था वही अब संदिग्ध लगने लगते हैं। सच और झूठ की रेखा धुंधली हो जाती है और इसी के साथ शहर में और भी कई सारी महिलाओं की हत्याएं होने लगती है। इसका कुछ भी मुख्य कारण समझ में नहीं आ रहा था। पुलिस इस केस के इन्वेस्टिगेशन में लग जाती है। तो दोस्तों, अब सिद्धार्थ की पत्नी का गायब होना और शहर में हो रही हत्याओं का क्या कनेक्शन है? क्या पुलिस और सिद्धार्थ असली कातिल को ढूंढ पाएगी? यही देखेंगे हम आज की क्राइम थ्रोर कहानी में जिसका नाम है ओका पाठकम प्रकार। इस मूवी को डायरेक्ट किया है विनोद जी ने और आईmdb पर मिले हैं इस फिल्म को 7.1 आउट ऑफ 10। इस कहानी का क्लाइमेक्स बहुत ही शॉकिंग है तो उसे मिस मत करना। चलिए अब बिना किसी देरी के शुरू करते हैं आज की कहानी। कहानी की शुरुआत होती है कोर्ट रूम से। जहां पर डिफेंस लॉयर अपनी दलील दे रहा होता है। उस लॉयर का नाम होता है रत्नाकर। अब रत्नाकर के अपोजिशन लॉयर का नाम होता है सिद्धार्थ और यही हमारे कहानी का मेन कैरेक्टर है। अब सिद्धार्थ जो कि इस केस पर ध्यान ना देते हुए बैठे-बैठे किसी दूसरी दुनिया में खोया होता है। दरअसल किसी वजह से सिद्धार्थ काफी ज्यादा नशा करने लगा है और यहां पर जो उसके साथ हो रहा है, यह उसी के साइड इफेक्ट है। अब कोर्ट में सिद्धार्थ को उसकी बात रखने के लिए कहा जाता है। लेकिन सिद्धार्थ तो कुछ भी रिसोंड नहीं करता। वह तो कहीं और ही खोया होता है। यह देखकर अपोजिशन लॉयर रत्नाकर सिद्धार्थ को नशेड़ी बेवफा ऐसी गालियां देता है। यानी कि एक तरह से उसकी बेइज्जती करने लगता है। अब यह सुनकर सिद्धार्थ को बहुत ही गुस्सा आ जाता है। वह किसी भी बात की परवाह किए बिना रत्नाकर का कॉलर पकड़ लेता है और उसे मारने पीटने लगता है। अब जज साहब यह देखकर सिद्धार्थ को डांट लगाते हैं। कहते हैं सिद्धार्थ यह क्या नॉन से चल रहा है? फिर सिद्धार्थ का ऐसा बर्ताव देखकर जज तुरंत ही उसे 6 महीने के लिए सस्पेंड कर देते हैं। यानी कि दोस्तों अब सिद्धार्थ 6 महीने के लिए कोई भी केस नहीं लड़ सकता और सिद्धार्थ जिस हालत में था ना उसके लिए तो यही ठीक था। अब सिद्धार्थ की हालत कैसे हुई यह दिखाने के लिए कहानी जाती है फ्लैशबैक में। अब यहां पर हम सिद्धार्थ को देखते हैं जो कि एक अच्छा वकील होने के साथ-साथ एक अच्छा इंसान भी है। कैसी भी परिस्थिति हो वह हमेशा क्राइम के खिलाफ खड़ा रहता है। अब यही दिखाने के लिए सिद्धार्थ ने लड़ा हुआ एक केस दिखाया जाता है जो कि शंकर नाम के एक बहुत बड़े गुंडे के खिलाफ था। दरअसल दोस्तों शंकर ने एक बच्चे के साथ गलत काम किया था और यह शंकर बहुत ही खतरनाक गुंडा होता है। उसके लिए लोगों को मारना इसे गलत काम करना कोई नई बात नहीं थी और ऊपर से दोस्तों शंकर का जो लॉयर बनकर डिफेंस कर रहा था वो और कोई नहीं बल्कि रत्नाकर होता है। यानी कि रत्नाकर और सिद्धार्थ की प्रोफेशनल दुश्मनी तो बहुत ही पुरानी है। तो अब दोस्तों इस केस में सिद्धार्थ दम लगाकर शंकर से बिना डरे उसके खिलाफ सारे सबूत इकट्ठा करता है और उसे उम्र कैद की सजा दिलवा देता है। अब रत्नाकर यह केस हार चुका था और जब पुलिस शंकर को वहां से लेकर जा रही थी तो शंकर को बहुत गुस्सा आता है और वह सिद्धार्थ को बहुत बड़ी धमकी देते हुए कहता है एक बार में जल्द से रिहा हो जाओ फिर तुम्हें देखूंगा मैं तुम्हें बर्बाद कर दूंगा तुम्हें ऐसे तड़पातड़पा कर मारूंगा कि तुम अपनी जान की भीख मांगोगे लेकिन यहां पर सिद्धार्थ तो उसकी धमकी को इग्नोर कर देता है और अपने काम और जिंदगी में बिजी हो जाता है। अब उसके अगले सीन में हम देखते हैं एक दिन सिद्धार्थ किसी वृद्धाश्रम में जाता है। वह अपने क्लाइंट के माता-पिता से उनके प्रॉपर्टी पर साइन करवाने के लिए आया था। लेकिन तभी यहां पर सिद्धार्थ को एक लड़की आकर रोक देती है। दरअसल इस लड़की का नाम होता है सीता। सीता सिद्धार्थ से कहती है कि इनके बेटे यहां पर इन्हें छोड़कर गए हैं। अब उनके बिजनेस में नुकसान हो रहा है। तो तब जाकर उन्हें अपने माता-पिता की याद आई और अब उनकी जमीन बेचने के लिए इनकी साइन की जरूरत है। अब सिद्धार्थ को यहां पर पता चलता है कि सीता यहां पर अक्सर आती रहती है। इस वृद्धाश्रम में रहने वाले बूढ़े लोगों की मदद करने के लिए। अब दरअसल दोस्तों सिद्धार्थ जब सीता को पहली नजर में देखता है तो उसे तो सीता से प्यार हो जाता है। अब सिद्धार्थ सीता से कहता है कि देखिए मुझे यह सब पता नहीं था। बस मुझे इनके बेटे पेपर पर साइन करवाकर यहां लाने के लिए आ गए थे। तो मैं भी सब कुछ बिना डिटेल में पूछे अपना काम करने लगा। लेकिन अगर यहां पर ऐसी बात है तो मैं खुद इनके बेटों से बात करूंगा। उन्हें समझाऊंगा कि तुम्हारे माता-पिता को घर बुला लो। उनके अच्छे तरीके से देखभाल करो। वरना तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा। और तब तक तुम्हें अपने माता-पिता के जमीन के कागजातों पर सैन भी नहीं मिलेगी। अब सिद्धार्थ की यह सारी बातें सुनकर सीता उसे कहती है देखिए मैं आप पर चिल्लाई इसके लिए सॉरी मुझे नहीं पता था कि आप इतने अच्छे इंसान हैं। अब सीता तो दोस्तों सिद्धार्थ को पसंद आ चुकी थी तो वह किसी ना किसी बहाने से यहां वृद्धाश्रम में आकर सीता से मिलने की कोशिश करने लगा और देखते ही देखते उन दोनों में दोस्ती हो गई और फिर उन दोनों में प्यार भी हो जाता है। फिर उसके कुछ ही दिनों बाद हम देखते हैं यह दोनों मिलकर शादी भी कर लेते हैं। अब दोस्तों सिद्धार्थ की बात करें तो उसके माता-पिता इस दुनिया में नहीं है। वो अपने घर अपनी बहन अनु के साथ रहता है। बाकी सिद्धार्थ के घर पर उसके चाचा पेरेंट्स के तौर पर अक्सर आते रहते हैं। खैर अब यहां से कहानी आती है प्रेजेंट में। हम यहां पर सिद्धार्थ को एक बहुत ही बुरी हालत में देखते हैं। वह फुल नशे में धूत होकर किसी क्लब में दिव्या नाम की एक लड़की के साथ नशा कर रहा होता है। यह दिव्या भी बिल्कुल होश में नहीं थी। अब दिव्या हॉस्टल में रहती थी तो सिद्धार्थ उसे छोड़ने के लिए हॉस्टल में जाता है। लेकिन सिद्धार्थ के जाने के कुछ देर बाद हम देखते हैं कोई दिव्या का पीछा कर रहा है। अब वो उसके सामने आता है और उसे देखकर दिव्या थोड़ी खुश होती है। लेकिन सामने वाला इंसान दिव्या के सर पर जोरदार वार कर देता है। अब उसके अगली सुबह हम देखते हैं हॉस्टल से बहुत दूर पुलिस को दिव्या की लाश मिलती है। पुलिस तुरंत ही वहां पर पहुंचकर छानबीन शुरू कर देती है और इस केस को एसीपी राघव और उसके जूनियर कविता इन्वेस्टिगेट करने लगते हैं। यहां राघव तो मीडिया में इंटरव्यू देने में ही बिजी हो जाता है। लेकिन कविता दिव्या की लाश की अच्छी तरीके से जांच पड़ताल करती है और वह दिव्या के मुंह में एक पत्थर को नोटिस करती है। साथ ही एक जगह पर कातिल ने सिर जैसा निशान बनाया था। अब यह कातिल कौन है और यह सब क्यों कर रहा है? पुलिस को इसका पता लगाना था। अब लाश को पोस्टमार्टम को भेजने के बाद कविता इंस्पेक्टर राघव को इसके बारे में बताती है और यहां पर हम साफ-साफ देख पाते हैं कि इंस्पेक्टर राघव थोड़ा घमंड किस्म का इंसान है। वह कविता से जलता है और हर वक्त कविता से कहता है कि मैं तुम्हारा सीनियर हूं। तुम्हें बस मेरे ही ऑर्डर फॉलो करने होंगे और वह हर वक्त कविता को उसे सैल्यूट करने के लिए भी कहता है। ऐसा करके उसे अलग ही खुशी मिलती है। लेकिन दोस्तों कविता समझदारी दिखाते हुए उसकी बातों को नजरअंदाज करके वो बस अपना अच्छे तरीके से काम करती रहती है। अब यहां दूसरी तरफ हम सिद्धार्थ को देखते हैं जो कि किसी एंटिक शॉप में होता है। इस एंटिक शॉप के ओनर का नाम होता है जोसेफ। दरअसल जोसेफ सिद्धार्थ को जानता है और जोसेफ ने ही सिद्धार्थ को नशा करने की एडवाइस दी थी ताकि वह जिस दर्द से गुजर रहा है उसे उसे झेलने की शक्ति मिले। अब सिद्धार्थ जोसेफ से पूछता है वो कृष्णा की मूर्ति कहां है? क्या अब आ गई? फिर जोसेफ उस मूर्ति को लाकर उसे दे देता है और इसके बदले में जोसेफ सिद्धार्थ से पैसे भी नहीं लेता। अब सिद्धार्थ वहां से घर पर आता है और उस मूर्ति को लेकर अपने कमरे में चला जाता है। यहां से फिर से कहानी जाती है फ्लैशबैक में। यहां पर हमें सिद्धार्थ और उसकी पत्नी सीता की शादी के बाद क्या हुआ था यह दिखाया जाता है। उनकी शादीशुदा जिंदगी बहुत ही अच्छी चल रही थी। सिद्धार्थ एक बार जोसेफ के एंटेक शॉप में आता है। तब सीता ने उसे कृष्ण भगवान की मूर्ति लाने के लिए कहा था। अब उस वक्त शॉप में उस तरह की मूर्ति नहीं थी। तो जोसेफ सिद्धार्थ से वादा करता है कि कुछ ही दिनों में मैं उस मूर्ति को लेकर आऊंगा। इसके बाद सिद्धार्थ घर पर जाता है और सीता को लेकर मॉल में शॉपिंग करने के लिए जाता है। सीता यहां पर बहुत सारे कपड़े वगैरह खरीद लेती है। फिर सिद्धार्थ उस सामान की बिलिंग करने के लिए चला जाता है। यह काम निपटाने के बाद जब वह वापस लौटता है तो उस जगह पर उसे सीता कहीं दिखाई नहीं देती है। सिद्धार्थ अपनी पत्नी सीता को पूरे मॉल में ढूंढता है। लेकिन वह कहीं पर भी नहीं थी। अब यह देखकर वह बहुत ही परेशान हो जाता है। वह तुरंत ही सीता के मोबाइल पर कॉल करता है, लेकिन वह कॉल अन उठाती है। दरअसल सीता अपना मोबाइल घर पर ही भूल गई थी। अब यह देखकर बिना देर किए सिद्धार्थ तुरंत ही पुलिस स्टेशन चला जाता है और सीता के मिसिंग कंप्लेंट लिखवा देता है। अब ऐसे कुछ दिन बीत जाते हैं लेकिन सीता का कोई भी पता नहीं चलता। अब सीता के ना मिलने की वजह से वह बहुत ही निराश हो जाता है। डिप्रेशन में भी चला जाता है। मगर उसे एक दिन एक बात याद आती है। सिद्धार्थ को याद आता है कि उसने शंकर के खिलाफ केस लड़ा था। तब शंकर ने उसे धमकी दी थी कि वो उसकी लाइफ को बर्बाद करेगा। तो कहीं उसकी पत्नी सीता को शंकर ने अगवा नहीं किया क्योंकि उसके आदमी बाहर एक्टिव भी थे। तो सिद्धार्थ जेल में शंकर से मिलने के लिए जाता है। वो शंकर से कहता है अगर तूने मेरी पत्नी को किडनैप किया है तो अभी के अभी उसे छोड़ दे। दुश्मनी तुम्हारे और मेरे बीच में है। उसे बीच में मत ला। और मैंने उस दिन जो किया था वह बस मेरा काम था। अब यह सुनने के बाद शंकर गुस्से में आकर सिद्धार्थ को मारने पीटने लगता है और वह कहता है कि काश मैंने ही यह सब कुछ किया होता। मेरा यहां जेल में रहकर बस नहीं चल रहा। वरना मैं तुम्हारी पत्नी को कब का खत्म कर चुका होता। साथ ही तुम्हारी बहन को भी। अब यहां पर बहन का भी नाम सुनकर सिद्धार्थ को बहुत ही गुस्सा आ जाता है। वह शंकर को बहुत बुरे तरीके से मारता है। अब उसके बाद दोस्तों एक दिन सिद्धार्थ को पुलिस का फोन आता है। दरअसल पुलिस को एक लड़की की लाश मिली थी। उनको लगता है कि यह सीता की ही लाश है। तो पुलिस सिद्धार्थ को जान पहचान करने के लिए बुलाते हैं। अब सिद्धार्थ भी बहुत दुखी हो जाता है। वह भारी मन से जाकर देखता है। लेकिन वो उसकी पत्नी सीता की लाश नहीं थी। अब दोस्तों सीता कहां है? फिलहाल वह किस हालत में है? यह तो किसी को नहीं पता था और यही दुख सिद्धार्थ को खाया जा रहा था कि क्या उसकी पत्नी सही सलामत होगी और वह उसे कभी ढूंढ पाएगा या नहीं। अब प्रेजेंट में यहां पर सिद्धार्थ के आंटी और अंकल उसे बताते हैं कि हमने तुम्हारे बहन अनु के लिए एक लड़का देखा है। बेटा अगर तुम कहो तो हम उसे बुला लें। सिद्धार्थ भी कहता है ठीक है उसे बुला लो। अगर सब कुछ ठीक रहा तो जल्दी हम उसकी शादी करवा देंगे। अब यहां पर दोस्तों हमें एक और बात पता चलती है जो इंस्पेक्टर कविता है ना दरअसल वो अनो सिद्धार्थ की कजिन है और वह भी लगातार पुलिस की मदद से सीता की तलाश करने में जुटी हुई थी। अब इसी बीच वो मरी हुई लड़की दिव्या का पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ जाता है। डॉक्टर ऑफिसर कविता और राघव को बताते हैं कि करीबन रात के 1 से 2:30 बजे दिव्या को मारा गया है और साथ ही जिसने उसे मारा है उसने पहले दिव्या का शारीरिक शोषण किया। फिर दिव्या के प्राइवेट पार्ट पर एक जहरीला कीड़ा छोड़ दिया जिसके काटने की वजह से दिव्या की मौत हो गई और उस अपराधी ने दिव्या के साथ दुष्कर्म किया था। इसी कारण उसके सीमन के जरिए हमें कातिल का ब्लड ग्रुप भी मिल चुका है जो कि है एबी नेगेटिव। अब यह सारी बातें पता चलने के बाद राघव और कविता दिव्या के हॉस्टल जाते हैं वहां पर पूछताछ करने के लिए। अब वहां के वार्डन को धमकाने पर वह सब कुछ बता देता है कि दिव्या का एक दिनेश नाम का बॉयफ्रेंड था और उसने दिव्या को नशीली चीजों में फंसाया था और दिव्या हर रात 1:00 बजे के बाद ही हॉस्टल आती थी। वार्डन को पता ना चले इसके बदले में वह मुझे पैसे देती थी तो गार्ड ने बताए हुए इंफॉर्मेशन के तहत पुलिस तुरंत ही दिनेश को उठा लेती है ताकि कविता का पता लग तब कविता को पता चलता है कि दिनेश ने तो दिव्या के साथ कब का ब्रेकअप कर लिया है और फिलहाल वह अपना बॉयफ्रेंड किसी और को बनाकर उसके साथ घूमती थी वो उसका जो भी बॉयफ्रेंड था वह रात को दिव्या को छोड़ने के लिए आया करता था तो शक होता है कि उसी ने दिव्या को मारा होगा। अब दोस्तों इस दिनेश का ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव था जो कि कातिल के ब्लड ग्रुप से मैच नहीं होता। इसलिए कविता को लगता है कि दिनेश बेगुनाह है जिस वजह से वह उसे छोड़ देती है। फिर इंस्पेक्टर राघव दिव्या के कॉल रिकॉर्ड्स निकलवाता है और उसमें कई सारे नंबर के साथ सिद्धार्थ का भी नंबर मिल जाता है। और दोस्तों इत्तेफाक की बात तो यह है कि सिद्धार्थ का ब्लड ग्रुप एबी नेगेटिव होता है। तो बस इसी बलबूते पर इंस्पेक्टर राघव सिद्धार्थ को अरेस्ट करके सीधा कोर्ट रूम में पेश करता है। और दरअसल दोस्तों उस रात सिद्धार्थ ने ही दिव्या को ड्रॉप किया था उसके हॉस्टल पर। अब यहां कोर्ट में हम देखते हैं इस केस में अपोजिशन में रत्नाकर ही केस लड़ने वाला था। और सिद्धार्थ खुद वकील होने की वजह से वह खुद ही अपना डिफेंस करने का फैसला करता है। अब रत्नाकर की तरफ से कोर्ट में तीन सबूत पेश किए जाते हैं। पहले गवाह के तौर पर दिनेश को पेश किया जाता है। जिसने देखा था कि सिद्धार्थ ने दिव्या को उस रात हॉस्टल में ड्रॉप किया था। तो इस पॉइंट पर सिद्धार्थ दिनेश से पूछता है कि तुमने मुझे बस दिव्या को ड्रॉप करते हुए देखा था। पर क्या तुमने मुझे खून करते हुए देखा? जिस पर दिनेश ना बोलता है। अब अगला सबूत था डीएनए यानी कि सिद्धार्थ का बाल जो कि दिव्या के कपड़ों पर मिला था। दरअसल दोस्तों उस रात क्लब में सिद्धार्थ और दिव्या ने एक साथ एक फोटो खिंचवाई थी तो उस वक्त सिद्धार्थ का बाल दिव्या के कपड़ों पर गिर गया होगा तो यह सबूत भी बेकार चला जाता है। अब तीसरा और आखिरी सबूत होता है सिद्धार्थ का ब्लड ग्रुप जो कि कातिल के सीमन से मैच कर रहा होता है। लेकिन इस पर सिद्धार्थ कहता है कि क्या जिसका भी ब्लड ग्रुप एबी नेगेटिव होगा पुलिस उसे अरेस्ट कर लेगी क्या? तभी इंस्पेक्टर राघव कहता है लेकिन दिव्या की मौत वाले दिन तुमने दिव्या को दो बार कॉल किया था। जिस पर सिद्धार्थ कहता है इस हिसाब से तो आपको हर उस आदमी से इंट्रोगेशन करनी चाहिए जिसने दिव्या को कॉल किया था। भला मुझ में ऐसा क्या स्पेशल है जो आपने मुझे अरेस्ट कर लिया। आगे सिद्धार्थ कहता है देखिए मेरी दिव्या से दोस्ती उस क्लब में हुई थी और वह भी एक हफ्ते पहले। वो बस मेरी अच्छी फ्रेंड बन गई थी। हमारे बीच वैसा कुछ नहीं था। बाकी वह अकेले जाती थी। इसलिए पिछले तीन दिनों से मैं उसे उसके हॉस्टल पर ड्रॉप करने लगा था। बाकी उसकी मौत का मुझसे कोई भी लेना देना नहीं है। और मुझे तो उसकी मौत के बारे में तब पता चला जब पुलिस ने मुझे अरेस्ट किया जिस रात मैंने दिव्या को छोड़ा और उसकी मौत हुई थी। तो दिव्या को छोड़ने के बाद मैं तो अपने ऑफिस की तरफ निकल गया जहां पर एक चौराहे पर मैं ड्रिंक को ड्राइव करने की वजह से मेरा चालान कटा और वो चालान मैंने भरा भी रात के 12:25 पर और बाकी कातिल ने दिव्या को जहां पर ले जाकर मारा था और उसके अपोजिट के दूसरे दिशा में मेरा चालान कटा था तो इस बीच का डिस्टेंस 40 कि.मी. है और उसी टाइम के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हिसाब से दिव्या को मारा गया। तो भला यह कैसे पॉसिबल है कि मैं 15-20 मिनट में वहां पर पहुंचकर दिव्या को मार डालूं। मेरा इतनी दूर से दिव्या जहां पर मरी थी वहां पर पहुंचना इंपॉसिबल है। तो अब यह सारे डिटेल्स दिखाकर सिद्धार्थ खुद को बेगुनाह साबित कर लेता है और कोर्ट भी उसे बाइज्जत बरी कर देती है। लेकिन अब इंस्पेक्टर राघव के इस तरह के केसेस को भी उठाकर कोर्ट में पेश करने की वजह से उसका सीनियर ऑफिसर उसे खूब डांटता है और अब इस वजह से वो दिव्या का पूरा केस कविता को सौंप देता है कि अब तुम ही अकेले इस दिव्या के केस को हैंडल करो। यानी कि दोस्तों अब कविता को किसी को भी रिपोर्ट करने की जरूरत नहीं थी। लेकिन फिर भी हम देखते हैं इधर पुलिस भी दिव्या के केस को सुलझा नहीं पा रही थी और इसी दौरान एक और अनहोनी हो जाती है। दरअसल वकील रत्नाकर की पत्नी का भी खून हो जाता है। उसकी पत्नी का नाम होता है श्वेता। श्वेता को बेहोश करने के बाद कातिल ने उसे दूसरी जगह ले जाकर मारा था। अब जहां पर श्वेता की लाश मिलती है। कविता केस की इन्वेस्टिगेशन करने के लिए पहुंचती है और श्वेता को कातिल ने भुसे के एक ट्रक की ट्रॉली से मारा था। अब यहां लाश के आसपास कविता को तो कुछ खास नहीं मिलता। लेकिन उसको एक बहुत ही चौंका देने वाली चीज मिलती है। श्वेता को लाश के पास वकील सिद्धार्थ का वॉलेट मिलता है। जिसे लेकर कविता तुरंत ही सिद्धार्थ के पास पहुंचती है। वो उसे कहती है भले ही तुमने कोर्ट में सबूतों को झुठला दिया हो तो यहां पर तुम पहली बार बच गए हो लेकिन तुम मुझे ऑफिसर राघव समझने की गलती मत करना। अगर तुम्हारा इन मर्डर्स के पीछे जरा सा भी हाथ होगा ना तो समझ लेना मैं पूरे सबूत के साथ तुम्हें अरेस्ट करके ले जाऊंगी। अब कविता की यह बातें सुनकर सिद्धार्थ को अजीब लगता है। वह कुछ समझ नहीं पाता। साथ ही उसे यह भी पता नहीं था कि उसका वॉलेट श्वेता की लाश के पास कैसे पहुंचा। एक तो वह यहां पर अपनी लापता पत्नी को ढूंढ रहा है और वहीं दूसरी तरफ जो भी लोगों को मार रहा है, वह सिद्धार्थ को इन केस में फंसाने की कोशिश कर रहा है। सिद्धार्थ की चीजें उन लाशों के पास रखकर। यानी कि दोस्तों अब सिद्धार्थ को ना चाहते हुए भी इन केसेस से अपना नाम हटाने के लिए असली कातिल को ढूंढना होगा। इसलिए अब सिद्धार्थ तुरंत अपने एक डॉक्टर दोस्त से मिलने के लिए जाता है जो कि और कोई नहीं बल्कि वही डॉक्टर होता है जिसने दिव्या की बॉडी का पोस्टमार्टम किया था। अब यहां डॉक्टर के जरिए सिद्धार्थ को पता चलता है कि दिव्या के बॉडी पर तीन तरह के ब्लड ग्रुप पाए गए। एक तो ओ पॉजिटिव जो कि दिव्या का ब्लड ग्रुप था। दूसरा सीमन से एबी नेगेटिव जो कि किलर का ब्लड ग्रुप है और तीसरा ब्लड ग्रुप था एबी पॉजिटिव। अब यहां पर यह एबी पॉजिटिव ब्लड ग्रुप किसका था? यह बात सिद्धार्थ को समझ नहीं आती है। अब डॉक्टर वे इसके बारे में अपने एक दूसरे डॉक्टर दोस्त से पूछता है तो उन्हें पता चलता है कि कुछ लोगों के सीमन के ब्लड ग्रुप में एचआर फैक्टर इनबैलेंस होने की वजह से सीमन में नेगेटिव और रियल ब्लड में पॉजिटिव हो जाता है। यानी कि वो एक ही इंसान का ब्लड ग्रुप होता है। बस अलग-अलग पॉजिटिव और नेगेटिव दिखाता है। दरअसल दोस्तों यह एचआर फैक्टर एक तरह का प्रोटीन होता है। हमारे रेड ब्लड सेल्स में अगर यह प्रेजेंट है तो ब्लड ग्रुप पॉजिटिव होगा। नहीं तो उसके ना होने पर हम उसे नेगेटिव बोलते हैं। जैसा कि इस केस में एबी नेगेटिव और एबी पॉजिटिव दिखा रहा है। खैर अब सिद्धार्थ उसके बाद और भी कुछ इन्वेस्टिगेशन करता है। फिर वो अपने डॉक्टर दोस्त की मदद लेता है एक बार डीजेपी से मिलने के लिए ताकि उसे जो भी पता चला है वह उसके बारे में डीजीपी को बता सके। अब उसके अगले दिन हम देखते हैं डीजेपी कविता के साथ डॉक्टर के कहने पर सिद्धार्थ से मिलने के लिए आता है। यहां पर सिद्धार्थ उनको सब कुछ बता देता है कि जहां पर उसे दिव्या की लाश मिली थी वह वहां पर गया था तो वहां पर मुझे कुछ गहने, कुछ घास, एक पत्थर और सी लिखा हुआ मिला। साथ ही एक सफेद पेपर भी मिला था। और दोस्तों, यहां पर सिद्धार्थ को कुछ नट बुल्स भी मिले थे। वहां पर कुछ दूरी पर जिनमें पेडीआर लिखा था। अब दरअसल यह सारे चीजें छोड़कर किलर ने अपने अगले मर्डर की हिंट दी थी। श्वेता की लाश एक धान के खेत में ट्रैक्टर में मिली थी। जो जगह पेड़ादर गांव में है मतलब कि पीडीयार। फिर मैंने जब श्वेता की लाश वाली जगह को अच्छी तरीके से देखा तो वहां पर मुझे कुछ रंग-बिरंगे धागे मिले। साथ ही ट्रक की ट्रॉली के नीचे एक मोटा काला धागा जिस पर पीक का शेप बना हुआ था और यह सब कुछ उस सीरियल किलर ने ही किया था। वह मर्डर के 10 दिन होने के बाद अगला मर्डर करता है। इस तरह से श्वेता को मरे हुए 10 दिन बीत चुके हैं। अब यह साइको किलर जो हमें कुछ कहना चाहता है और उसने हमें चैलेंज दिया है कि वह तीसरा मर्डर करने जा रहा है। पकड़ सके तो पकड़ लो। अब सिद्धार्थ को तीसरे मर्डर का अंदाजा लग चुका था। रंगे-बेंगे धागे का मतलब होता है कि वह अगला खून किसी कॉटन मिल में करेगा। अब शहर से 40 कि.मी. के बाहर पुरानी कॉटन मिल थी तो हो सकता है कि अगली लाश वहां पर मिल जाए। बाकी यहां पर सिद्धार्थ डीजीपी से उस ब्लड ग्रुप वाली बात को भी शेयर करता है कि कातिल का रियल ब्लड ग्रुप एबी नेगेटिव नहीं है बल्कि एबी पॉजिटिव है। और अब दोस्तों क्योंकि पुलिस का शक सिद्धार्थ पर है तो सिद्धार्थ खुद कविता के साथ मिलकर इस केस की इन्वेस्टिगेशन करने में लग जाता है ताकि वह खुद को बेगुनाह साबित कर सके और डिस्क के लिए डीजेपी भी सिद्धार्थ को अथॉरिटी दे देता है। फिर तुरंत ही सिद्धार्थ कविता के साथ मिलकर उस कॉटन मिल में पहुंचता है। तो शॉकिंगली यहां पर उनको फ्रिज के अंदर पहले किसी लड़की को मार कर रखा गया था। उसकी लाश मिलती है और उसके चेहरे पर आई लिखा था। यानी कि पहले सी, दूसरे पे पी और तीसरे पे आई। इन सबको जोड़ा जाए तो एक मीनिंगफुल वर्ड बनता है आईपीसी। अब उस जगह पर सिद्धार्थ को अपना ड्राइविंग लाइसेंस भी मिलता है। जिससे कि अब यह साफ हो जाता है कि किलर किसी भी तरह से सिद्धार्थ को इन मौत के कि केस में फंसाना चाहता है और दोस्तों, उस लड़की को फ्रिज के अंदर किलर ने चूहे के साथ छोड़ दिया था। फिर उन चूहों ने उस लड़की को बुरा नोचा और साथ ही ठंड की वजह से उस लड़की ने दम तोड़ दिया। इस तरह से उस लड़की की दर्दनाक मौत हुई थी। अब यहां पर उनको एक कागज पर आर एन बीआर लिखा हुआ मिलता है। अब इस आर एनबीआर को डिकोड करने के लिए सिद्धार्थ को 2 दिन लग जाते हैं और यह लोग एक दिन और लेट हो जाते हैं। आर एनबीआर का मतलब होता है रानी बर्नर सिमेट्री जहां पर 24 घंटे पहले ही किलर ने अपने चौथे मर्डर को अंजाम दे दिया था। रानी बर्नर की एक पुरानी भट्टी में किलर ने उस महिला को मारकर उसे वहीं जलाकर राख कर दिया। अब छानबीन करने पर यहां पर भी उन्हें कुछ खास नहीं मिलता। सिवाय एक पेपर के जिस पे सीएफए टी लिखा हुआ था। अब कातिल का पता लगाने के लिए सिद्धार्थ को इस सीएफए टी को डिकोड करना था। तभी केस को अगली दिशा मिल सकती थी। अब दोस्तों यहां पर अल्फाबेट की नंबरिंग की जाए तो सीएफई इन ऑर्डर्स के हिसाब से बनता है 361 और टी का बनता है 20 और टी 20वां अल्फाबेट है इसलिए उसका बनता है 20। तो अब जब 361 करोगे तो उसका 10 आता है। तो इस तरह से सब नंबर को मिलाया जाए तो 361201 और जैसा कि हमें पता है इससे पहले सिद्धार्थ को एक कोड मिला था आईपीसी। तो यह सब कुछ देखने के बाद सिद्धार्थ को समझने में देरी नहीं लगती है। वह समझ जाता है कि असल में यह किसी केस का नंबर है 3610। अब इस केस की फाइल तुरंत ही रिकॉर्ड रूम से सिद्धार्थ को मिल जाती है। और दोस्तों यहां पर आता है एक बहुत बड़ा ट्विस्ट। उसे देखते ही सिद्धार्थ को याद आता है यह केस तो अजय नाम के एक बंदे का है जो कि एक बच्चे का शारीरिक शोषण करने के जुर्म में जेल में गया था। और इस केस में सिद्धार्थ ने ही अजय के ऊपर कारवाई की थी। बल्कि तो सिद्धार्थ ने इस बंदे को एक बच्चे के साथ गलत काम करते हुए पकड़ा था। जिसके बाद उसको अरेस्ट भी सिद्धार्थ ने करवाया था। तो दोस्तों जाहिर सी बात है यह सारे खून अजय ही कर रहा होगा जो कि अब लौट आया है। यानी कि वह जेल से अपनी सजा काटकर आजाद हो चुका है। इसलिए उसने सिद्धार्थ से अपना बदला लेना शुरू कर दिया है। इसी कारण की वजह से उसने छह महिलाओं को मार डाला। अब ना जाने वो कितनी और महिलाओं को मार डालेगा। अब यहां पर हमें फ्लैशबैक के जरिए अजय की स्टोरी को दिखाया जाता है। अब दरअसल दोस्तों अजय दिनरा लड़कियों के ही सपने देखता रहता था और वह उसी बिल्डिंग के फ्लैट में रहता था जहां पर सिद्धार्थ रहता है। अब एक दिन सिद्धार्थ कहीं बाहर जा रहा होता है तो वह वहां पर एक बच्चे को खेलते हुए देखता है और वो बच्चे खेलते हुए वहां से कहीं चली जाती है। अब कुछ देर के बाद सिद्धार्थ देखता है उस बच्ची की मां अपनी बेटी को इधर-उधर ढूंढ रही है। इस पॉइंट पर सिद्धार्थ देखता है कि जिस टॉय से वह बच्चा खेल रहा था वो असल में एक फ्लैट के दरवाजे के पास पड़ा है और चॉकलेट का लालच देखकर अजय ने उसे अंदर बुला लिया था। सिद्धार्थ उस बच्चे के रोने की आवाज सुनकर तुरंत ही अंदर घुस जाता है और वहां पर अजय बिना कपड़ों के होता है। बच्ची वहां पर बैठकर रो रही थी। सिद्धार्थ तुरंत ही उस बच्ची को अपनी गोद में उठा लेता है और यहां पर वह अजय को काफी मारता है। उस बच्चे की मां भी अजय को बहुत मारती है। उसके बाद सिद्धार्थ अजय को घसीटते हुए पुलिस स्टेशन ले जाता है। उसे कोर्ट में पेश करता है और सिद्धार्थ ने उसके खिलाफ केस लड़ा था। जिस वजह से आखिरकार अजय को जेल हुई थी और यह जेल की सजा 10 साल की थी। लेकिन अब शायद वह अपनी सजा पूरी करके लौट चुका है। क्योंकि दोस्तों इस घटना को पूरे 15 साल बीत चुके हैं। फिर सिद्धार्थ बताता है कि रानी बर्नर सिमेट्री में जिसे अजय ने जिंदा जलाया था वो महिला और कोई नहीं है बल्कि उसी बच्ची की मां थी। बाकी जिसकी लाश उन्हें कॉटन मील में मिली थी वो उस बच्ची काव्या की लाश थी। जिसकी वजह से अजय को जेल हुई थी। बाकी दोस्तों उस लड़की दिव्या और श्वेता को उस साइको किलर अजय ने सिर्फ सिद्धार्थ को फंसाने के लिए मार डाला। और अब यहां सिद्धार्थ जब सारी चीजें कह रहा होता है तभी उसके दिमाग में आता है कि अगर अजय ने यह सब कुछ मुझे फंसाने के लिए किया है तो जाहिर सी बात है कि उसने सीता को भी अगवा किया होगा। यस मैं सही सोच रहा हूं। मेरी पत्नी को उसने किडनैप किया होगा। अब यह समझते ही सिद्धार्थ कविता के साथ सीधा अजय के घर पर उसे अरेस्ट करने के लिए पहुंचता है। लेकिन वहां पर उन दोनों को पता चलता है कि शॉकिंगली अजय तो पहले से मर चुका है। दरअसल जब वह जेल से छूट गया था तो लोगों ने उसको बहुत भला बुरा कहा। जिस वजह से उसने तंग आकर अपनी जान ले ली। अब यह खबर जानकर वह दोनों ही शॉक हो जाते हैं। ऊपर से इंस्पेक्टर राघव ने कविता के जलन के मारे मीडिया को यह सारी बात बता देता है कि देखो मरे हुए आदमी को अरेस्ट करने के लिए गए हैं। जिस कारणवश मीडिया इन लोगों को घेर लेती है। अब यह खबर जब डीजीपी को पता चलती है तो वह सिद्धार्थ को इस इन्वेस्टिगेशन केस से तुरंत ही हटा देता है ताकि यहां पर और भी कुछ गड़बड़ ना हो और पुलिस के खिलाफ पब्लिक में कुछ गलतफहमी ना फैले। साथ ही वह यहां पर कविता को भी बहुत डांटता है। लेकिन दोस्तों इतना सब कुछ होने के बावजूद भी सिद्धार्थ शांत नहीं बैठता। वह थोड़ी और इन्वेस्टिगेशन करता है। तब उसे पता चलता है कि दरअसल अजय जब जेल से छूटने के बाद कोचिन गया था। वहां पर उसने जुबेन नाम के एक लड़के से दोस्ती की। फिर अजय के Facebook अकाउंट से सिद्धार्थ को पता चलता है कि अजय ने Facebook पर एक ब्लड डोनेशन ग्रुप बनाया था ताकि वह ऐसे लोगों को ढूंढ सके जिसकी कद काठी और ब्लड ग्रुप ठीक अजय से मिलताजुलता हो और जल्द ही उसे वह जुबेन नाम का दोस्त मिल जाता है जो कि उसके जरूरत के हिसाब से बिल्कुल फिट था। फिर क्या था दोस्तों अजय ने उस जुबेन को मारकर उसकी बॉडी को जला दिया और इस केस को ऐसा दिखाया कि अजय ने अपनी खुद की जान ले ली जबकि वह खुद जिंदा है और असल में वह जुबेन की लाश थी और जुबेन के पिता ने अपने बेटे की मिसिंग कंप्लेंट एक साल पहले लिखवाई थी और ऊपर से अजय जुबेन को कोचिन से पहले ही शर लेकर आया था जिसकी डिटेल्स भी मिल गई थी यानी कि दोस्तों कुल मिलाकर कहा जाए तो अजय अभी जिंदा है। वह मरा नहीं है। अब यह सब कुछ पता चलते ही सिद्धार्थ यह कविता को बता देता है। लेकिन अब यह लोग अजय को कैसे पकड़ेंगे यह उन्हें समझ नहीं आ रहा था। अब उसके बाद हम सिद्धार्थ की बहन अनु को देखते हैं। जिसे कूरियर वाला कॉल करके घर के बाहर बुलाता है। अब यहां कूरियर वाली गाड़ी के पास अनु को कोई नहीं देखता। लेकिन तभी दोस्तों अनु की नजर किसी पर पड़ती है। लगता है वह उसे पहले से जानती है। इसलिए वह उसे देखकर थोड़ा मुस्कुराती है। लेकिन तभी अचानक सामने वाला बंदा तुरंत ही अनु पर जानलेवा हमला करता है। अब इस हमले में अनु मरती तो नहीं है। उसे तुरंत ही हॉस्पिटल में भर्ती किया जाता है। यह खबर मिलते ही सिद्धार्थ तुरंत ही वहां पर पहुंचता है। अब यहां पर कविता उसे बताती है कि अनु ने मुझे बताया कि उसके ऊपर हमला तुमने किया है। अब मैं तो यह जानते हो कि तुम ऐसा कुछ नहीं कर सकते। लेकिन लोगों को यही दिख रहा है। इसलिए पुलिस जल्द ही तुम्हें अरेस्ट करने के लिए आएगी। तो अब जो भी करना होगा तुम्हें जल्द ही करना होगा। किसी भी तरह से उस किलर का पता लगाओ। अब उसके बाद सिद्धार्थ रात को तुरंत ही उस स्पॉट पर पहुंचता है जहां पर अनु पर हमला हुआ था। अब वहां के एक पेड़ पर सिद्धार्थ एक डॉल को देखता है जिसमें से उसको एक सड़ा पेपर मिलता है। ठीक वैसा ही पेपर जैसा कि सिद्धार्थ को दिव्या के मर्डर्स के स्पॉट पर मिला था। अब इन दोनों पेपर्स को जब सिद्धार्थ एक सॉल्यूशन में डिप करता है। उसके बाद उसे अल्ट्रावायलेट स्लाइड से देखता है तो यहां पर उसे एक जगह का एड्रेस मिलता है। और दोस्तों यहां पर आता है कहानी का बहुत बड़ा ट्विस्ट। दरअसल दोस्तों वो एड्रेस और किसी का नहीं बल्कि उस एंटिक शॉप वाले जोसेफ का होता है। सिद्धार्थ बिना देरी किए जोसेफ के शॉप पर पहुंचता है और वहां पर उसे कमरे के अंदर सारे सबूत मिल जाते हैं। उसे देखकर यह प्रूफ हो जाता है कि यहीं पर वो कातिल मौजूद है। अब तभी हम देखते हैं सिद्धार्थ के पीछे उसके जैसे हुबहू दिखने वाला आदमी खड़ा है। अब वह इंसान हंसते हुए सिद्धार्थ के मास्क को हटा देता है। और दोस्तों यह और कोई नहीं बल्कि जोसेफ है। वही सब मर्डर करके सिद्धार्थ को फंसाने की कोशिश कर रहा था। फिर जोसेफ यहां पर सिद्धार्थ से हंसते हुए बताता है कि असल में मैं अजय हूं जो कि इस दुनिया के सामने जोसेफ बनकर जी रहा हूं। जी हां दोस्तों वही अजय जिसे सिद्धार्थ ने जेल भिजवाया था। अब यहां पर हमें पता चलता है कि अजय ने जोसेफ जैसा दिखने के लिए अपने प्लास्टिक सर्जरी करवाई थी। फिर उसने एक एंटिक शॉप खोली और जब भी सिद्धार्थ उसके शॉप पर आता था तो उसने उसके साथ दोस्ती कर ली। फिर उसने सिद्धार्थ की पत्नी सीता को किडनैप कर लिया। जिसके बाद सिद्धार्थ को नशे की आदत भी लगवा दी। यानी कि दोस्तों कुल मिलाकर जोसेफ ही अजय है। उसी ने सिद्धार्थ की दोस्ती दिव्या से करवाई। उसके बाद उसने दिव्या के साथ-साथ तीन मर्डर किए सिद्धार्थ का मास्क पहनकर ताकि इन केसेस में सिद्धार्थ पकड़ा जाए और उस दिन उसने मॉल में सीता को भी सिद्धार्थ का मांस पहनकर ही अगवा किया था। इसलिए सीता उसे पहचान नहीं पाई। सिद्धार्थ की बहन अनु पर भी उसने सिद्धार्थ का ही मांस पहनकर हमला किया था। इसलिए अनूप अपने भाई को ही गुनहगार ठहरा रही थी। जोसेफ ने काफी कोशिश की से सिद्धार्थ को हर तरीके से तोड़ा जाए। उसे बहुत टॉर्चर किया ताकि उसके करीब रहकर उसके मदद ले सके। अब जोसेफ ने सिद्धार्थ को यहां पर इसलिए बुलाया था ताकि वह सिद्धार्थ को आज के दिन मारकर अपना बदला पूरा कर सके क्योंकि आज के दिन ही सिद्धार्थ ने अजय को सजा दिलवाई थी। अब यहां पर जोसेफ को अजय बोले तो भी चलेगा। इस अजय को तो बस सिद्धार्थ को टॉर्चर करके किसी भी हालत में मारना था। अब यहां अगले ही पल इन दोनों में फाइटिंग शुरू हो जाती है। दोनों एक दूसरे को बहुत मारते-पीटते हैं। अब सिद्धार्थ उसे लड़ते-झगड़ते एक कमरे में आ जाता है जहां चारों तरफ काफी बड़ा पिंजरा होता है और दोस्तों जिसके अंदर कई सारे दरवाजे हैं और उन्हीं में से एक दरवाजे के अंदर सिद्धार्थ अपनी पत्नी सीता को देखता है जो कि बंधी हुई हालत में है और उस पिंजरे के बाहर कई सारे कुत्ते हैं। अब जोसेफ सिद्धार्थ को इस पिंजरे में फंसा देता है। जहां पर कई सारे कुत्ते मिलकर सिद्धार्थ को काटते हैं। लेकिन दोस्तों फिर भी सिद्धार्थ आखिर तक सभी चीजों से लड़ते हुए सीता तक पहुंच जाता है। अब उसके दरवाजे पर ताला लगा होता है और उसकी चाबी होती है जोसेफ के पास। यह देखकर सिद्धार्थ जोसेफ को बहुत बुरी तरीके से मारता है। वो अपनी पूरी जान लगा देता है। फिर फाइनली वो किसी तरीके से जोसेफ से चाबी छीनकर वो उसके मुंह में उसी कीड़े को जबरदस्ती डाल देता है जो जोसेफ ने दिव्या के शरीर में डाला था। अब यह कीड़ा जहरीला था। वह कीड़ा जोसेफ का इंटेस्टाइन फाड़ कर बाहर आ जाता है। जिससे कि जोसेफ की वहीं पर तड़प-तड़प कर मौत हो जाती है। फिर सिद्धार्थ तुरंत ही सीता को आजाद करवाता है और आखिरकार वह दोनों ही बच जाते हैं। कहानी के एंडिंग में हम देखते हैं कि सीता और सिद्धार्थ अपनी जिंदगी बहुत ही खुशहाली से बिता रहे हैं और सिद्धार्थ की बहन अनु भी अब ठीक हो चुकी है। तो इसी हैप्पी एंडिंग के साथ यह कहानी यहीं पर एंड हो जाती है। तो दोस्तों, यह कहानी आपको कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताइएगा। साथ ही ऐसे ही अमेजिंग मूवी देखने के लिए हमारे चैनल को 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