कौन कहता है बारिशों में कोई ग़म नहीं, बादलों से बिछड़ने का, आसमां से ज़मीन पर उतरने का… ग़म किसने जाना कभी? कौन कहता है बारिशों में कोई ग़म नहीं। सूरज से सीधी बात करने का, हर मौसम संग लगी लगन का, बिछड़ना क्या कम है…?