खौफ… 18वीं मंज़िल पर रहने वाली एक औरत ने हमेशा की तरह खिड़की से नीचे कचरा फेंक दिया लेकिन इस बार वही कचरा सीधे उसकी अपनी बेटी के सिर पर जा गिरा लड़की तुरंत ज़मीन पर गिर पड़ी सांसें हल्की हल्की चल रही थीं नीचे शतरंज खेल रहे बुज़ुर्गों ने तुरंत एम्बुलेंस को फोन किया ऊपर खड़ी औरत ने जैसे ही शोर सुना और नीचे झांका तो घबरा गई लेकिन अपनी गलती मानने के बजाय उसने जल्दी से खिड़की बंद कर ली और ऐसे दिखाने लगी जैसे कुछ हुआ ही नहीं उसे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि जिस लड़की को उसने मारा है वही उसकी कुछ मिनट पहले फोन पर बात करने वाली प्यारी बेटी है दरअसल ये औरत अपने पति के सोसाइटी मैनेजर होने का घमंड करती थी बहुत बदतमीज़ थी और हमेशा आलस में कचरा खिड़की से ही नीचे फेंक देती थी पहले भी कई बार नीचे बैठे बुज़ुर्गों पर कचरा गिरा था लेकिन माफ़ी मांगने के बजाय वो उन्हें ही डांट देती थी मगर कहते हैं ना कर्मों का फल मिलता है उस दिन उसकी बेटी ही उसकी लापरवाही का शिकार बन गई उसी वक्त उसका पति गुनगुनाते हुए घर लौट रहा था तभी पीछे से एम्बुलेंस की आवाज़ सुनकर उसे गुस्सा आ गया और वो जानबूझकर रास्ता रोककर खड़ा हो गया एम्बुलेंस को आगे नहीं बढ़ने दिया एम्बुलेंस में मौजूद नर्स ने डॉक्टर से कहा कि लड़की की हालत बेहद गंभीर है हर सेकंड की देरी उसकी जान ले सकती है डॉक्टर ने तुरंत ड्राइवर से कहा कि किसी भी तरह आगे निकलो तभी सोसाइटी के गार्ड ने मैनेजर को फोन कर बताया कि किसी ने ऊपर से कचरा फेंककर एक लड़की को गंभीर रूप से घायल कर दिया है ये सुनते ही आदमी गुस्से में आग बबूला हो गया और उल्टा लड़की को ही दोष देने लगा कि वो रास्ता देख कर नहीं चल रही थी उसके दिमाग में बस साल के अंत की परफॉर्मेंस और अपनी इमेज की चिंता थी उसने गार्ड से कहा कि लड़की की फोटो भेजो देखता हूं कौन है उधर एम्बुलेंस लगातार हॉर्न बजा रही थी लेकिन वो आदमी ज़िद में आकर रास्ता रोके खड़ा था दूसरी तरफ गार्ड जब लड़की की फोटो खींच रहा था तो उसे चेहरा कुछ जाना पहचाना लगा लेकिन याद नहीं आ रहा था कि कहां देखा है उसने वीडियो बनाकर मैनेजर को भेज दिया जैसे ही आदमी वीडियो खोलने वाला था तभी उसकी पत्नी का फोन आ गया वो घबराई हुई थी और बोली कि उसने ऊपर से कचरा फेंका था और किसी को लग गया आदमी और गुस्सा हो गया और चिल्लाकर पूछा कि किसे लगा है लेकिन औरत ने कहा कि उसे नहीं पता उसने किसे मारा है… सच सामने आने ही वाला था और इस बार बचने का कोई रास्ता नहीं था