क्या आप जानते हैं… साल के 12 महीनों में एक ऐसा महीना है जिसमें अल्लाह अपनी रहमतें खुलकर बरसाता है… जिसमें बंदे की तक़दीर बदल सकती है… वो महीना है — रमज़ान। 🌙✨ रमज़ान सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है। यह सब्र का महीना है… तक़वा का महीना है… खुद को बदलने का महीना है। इसी महीने में क़ुरआन शरीफ़ नाज़िल हुआ। 📖 इसी महीने में जन्नत के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं, जहन्नम के दरवाज़े बंद कर दिए जाते हैं, और शैतान को क़ैद कर दिया जाता है। रोज़ा हमें सिखाता है — ज़ुबान को झूठ से बचाना… आँखों को गुनाह से बचाना… दिल को नफ़रत से साफ़ रखना। और इस महीने की एक रात — शब-ए-क़द्र 🌌 हज़ार महीनों से बेहतर है। सोचिए… एक रात की इबादत 83 साल से ज़्यादा का सवाब! लेकिन ज़रा ठहर कर सोचिए… कितने लोग थे जो पिछले साल हमारे साथ रोज़ा रख रहे थे… आज वो हमारे बीच नहीं हैं। हमें नहीं पता — यह रमज़ान हमारा आख़िरी भी हो सकता है… इस बार नमाज़ सिर्फ़ फ़र्ज़ नहीं होगी — यह हमारी पहचान होगी। क्या पता… अगला रमज़ान हमारी क़ब्र के अंदर हो… इसलिए अभी… इसी वक्त… दिल को झुका दीजिए… अल्लाह से सच्चे दिल से दुआ कीजिए — 🤲 “या अल्लाह… हमें इस रमज़ान में सच में बदल दे… हमारे गुनाह माफ़ कर दे… हमारी तक़दीर को अपनी रहमत से बेहतर लिख दे… और हमें अपनी रज़ा वाला बना दे…” आमीन। 🌙✨
