[[00:00:00] क्या आप मानेंगे कि महाशिवरात्रि सिर्फ एक विवाह उत्सव नहीं है? [00:00:03] यह कोई साधारण रात नहीं… [00:00:05] यह उस भयावह क्षण की स्मृति है, [00:00:07] जब पूरा ब्रह्मांड विनाश की कगार पर खड़ा था। [00:00:10] लोग कहते हैं महाशिवरात्रि शिवजी की [00:00:12] शादी की सालगिरह है। [00:00:14] लेकिन यह सच अधूरा है। [00:00:16] यह रात सिर्फ उत्सव की नहीं, [00:00:18] बल्कि उस अंधकार की गवाह है [00:00:20] जिसने सृष्टि को हिला दिया था। [00:00:22] एक ही रात में तीन ऐसी घटनाएं घटीं [00:00:25] जिन्होंने ब्रह्मांड का संतुलन बदल दिया। [00:00:27] एक ओर विवाह की शहनाइयां थीं, [00:00:29] दूसरी ओर मृत्यु का जहर, [00:00:31] और तीसरी ओर एक ऐसी अग्नि [00:00:33] जिसने ब्रह्मा और विष्णु का अहंकार तोड़ दिया। [00:00:36] अगर यह वीडियो 16 फरवरी से पहले देखा जा रहा है, [00:00:39] तो सावधान हो जाइए। [00:00:41] क्योंकि अब शुरू होती है [00:00:43] शिवलिंग के प्रकट होने की वो कथा [00:00:45] जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। [00:00:47] कहानी शुरू होती है… [00:00:49] एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी के बीच [00:00:51] महानता को लेकर युद्ध छिड़ गया। [00:00:53] दोनों का एक ही दावा था— [00:00:55] “मैं ही सबसे महान हूँ।” [00:00:57] लेकिन यहीं से संतुलन बिगड़ने लगा। [00:00:59] तभी उनके बीच अचानक [00:01:01] एक विशाल अनंत अग्नि स्तंभ प्रकट हुआ। [00:01:04] ना उसकी कोई शुरुआत थी, [00:01:06] ना कोई अंत। [00:01:08] उस स्तंभ से एक गंभीर आवाज गूंजी— [00:01:10] “जो मेरे अंतिम सिरे को खोज लेगा, [00:01:13] वही वास्तव में महान होगा।” [00:01:15] विष्णु जी वराह बनकर नीचे गए, [00:01:17] ब्रह्मा जी हंस बनकर ऊपर उड़े। [00:01:19] हजारों वर्ष बीत गए। [00:01:21] विष्णु जी को अंत नहीं मिला। [00:01:23] उन्होंने सत्य स्वीकार कर लिया। [00:01:25] लेकिन ब्रह्मा जी लौटे [00:01:27] और असत्य बोल दिया। [00:01:29] और तभी कहानी ने भयावह मोड़ लिया। [00:01:31] उस अग्नि स्तंभ से काल भैरव प्रकट हुए। [00:01:34] दंड स्वरूप उन्होंने ब्रह्मा जी का [00:01:36] वही सिर काट दिया [00:01:38] जिससे झूठ बोला गया था। [00:01:40] तभी समझ आया— [00:01:42] यह अग्नि स्वयं शिव थे। [00:01:44] शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे। [00:01:46] उनकी ऊर्जा अत्यंत उग्र थी। [00:01:48] उन्हें शांत करने के लिए [00:01:50] देवताओं ने जल और दूध अर्पित किया। [00:01:53] यही वह क्षण था [00:01:55] जब शिवलिंग पर रुद्राभिषेक की शुरुआत हुई। [00:01:57] लेकिन असली रहस्य अभी बाकी था। [00:01:59] जब देवता शक्ति खो चुके थे, [00:02:01] तब समुद्र मंथन हुआ। [00:02:03] सभी को अमृत की आशा थी। [00:02:05] पर निकला क्या? [00:02:07] अलहल विष। [00:02:09] पूरा संसार जलने लगा। [00:02:11] और एक बार फिर [00:02:13] भोलेनाथ आगे आए। [00:02:15] सृष्टि की रक्षा के लिए [00:02:17] उन्होंने उस उबलते विष को [00:02:19] अपने कंठ में रोक लिया। [00:02:21] विष की तपन से [00:02:23] शिवजी का शरीर जलने लगा। [00:02:25] उस वेदना को शांत करने के लिए [00:02:27] देवताओं ने पूरी रात [00:02:29] गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित किए। [00:02:32] उन्हें निद्रा न आए, [00:02:34] इसलिए पूरी रात [00:02:36] जागरण और भजन हुआ। [00:02:38] यही कारण है [00:02:40] कि महाशिवरात्रि पर [00:02:42] पूरी रात जागा जाता है। [00:02:44] लेकिन यह रात केवल डर की नहीं है। [00:02:46] इसी रात प्रेम ने भी विजय पाई। [00:02:48] माता सती के त्याग के बाद [00:02:50] शिवजी वैरागी बन गए थे। [00:02:52] संसार से दूर, [00:02:54] गहन समाधि में लीन। [00:02:56] तब माता सती [00:02:58] पार्वती के रूप में जन्मीं। [00:03:00] हजारों वर्षों की तपस्या [00:03:02] सिर्फ शिव को पाने के लिए। [00:03:04] और अंततः [00:03:06] इसी महाशिवरात्रि की रात [00:03:08] वह वैरागी फिर से दूल्हा बना। [00:03:10] शिव और शक्ति का मिलन हुआ। [00:03:12] इसलिए जब 16 फरवरी को [00:03:14] शिवलिंग पर [00:03:16] केवल एक लोटा जल चढ़े, [00:03:18] तो याद रखिए— [00:03:20] वह अग्नि को शांत कर रहा है, [00:03:22] और उस विष के दर्द को कम कर रहा है। [00:03:24] श्रद्धा से नमन करें। [00:03:26] हर हर महादेव।
