एक दिन ज़मीन पर दो सिक्के पड़े थे। एक नया, चमकदार। दूसरा पुराना, घिसा हुआ। चमकदार सिक्का बोला, “मुझे देखो, मैं ज़्यादा क़ीमती हूँ।” पुराना सिक्का मुस्कराया और बोला, “शायद… लेकिन मैंने ज़्यादा हाथ देखे हैं, ज़्यादा लोगों की मदद की है, और ज़्यादा सच को जाना है।” तभी एक ग़रीब आदमी आया, उसने दोनों सिक्के उठाए… और दोनों को बराबर समझकर अपनी जेब में रख लिया। क्योंकि क़ीमत चमक से नहीं, काम से होती है।