उसके भीतर भविष्य को लेकर उत्साह होता है। वह हर सुबह नई संभावना के साथ उठता है। वह अतीत में नहीं जीता। गरीब चेतना हमेशा अतीत में फंसी रहती है। किसने क्या कहा… किसने धोखा दिया… कौन साथ छोड़ गया… लेकिन समृद्ध चेतना वर्तमान में जीती है। क्योंकि वर्तमान ही शक्ति है। जो इंसान इस क्षण में पूरी तरह जीना सीख जाता है… उसी के भीतर सृजन की शक्ति जागती है। और याद रखना… पैसा बुरा नहीं है। पैसा केवल एक साधन है। उससे अच्छे काम भी हो सकते हैं… और बुरे काम भी। दोष पैसे का नहीं… चेतना का होता है। इसलिए धन का विरोध मत करो। लेकिन धन के गुलाम भी मत बनो। धन तुम्हारे हाथ में रहे… तुम्हारे सिर पर नहीं।