Shivapal

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@Shiva Pal
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रात के दो बजे, पार्टी में एंट्री, बोतल खुली, दुश्मन की यादें मिटी! गाड़ी पर स्टीकर – “जान लेवा यार”, जो भी छेड़ता, उसकी हार पक्की यार! पीछे से बात करे, सामने आके झुक जाए, मैं सीधा बोलता – भाई अब क्या छुपाए? तेरी औकात में फिट नहीं होता मेरा दर्जा, बदमाशी मेरे खून में, ये कोई मेडल नहीं है सजा! (Chorus) एक बदमाशी का, एक बदमाशी का! दुनिया देखे, पर समझ न पाए बात! एक बदमाशी का, एक बदमाशी का! राजा बनके जीना, यही है असली राज! (Bridge – धीमा फ्लो) जेल की दीवार भी टूट जाए मेरी आवाज से, क्योंकि बदमाश नहीं रुकता, चाहे कितनी भी सजा मिले… माँ रोती है, पर मैं कहता – टेंशन न ले माँ, तेरा बेटा बदमाश है, पर दिल का सच्चा है यार!

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