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Azka

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एक ऐसा बादशाह जिसकी फौज इतनी बड़ी थी कि जब वह चलते थे तो शहरों के शहर धूप में घुल जाते थे। जिसका गुरूर फिरौन से ज्यादा जिसका खजाना कारून से भी भरा हुआ और जिसका नाम सुनके बादशाहों की रातों की नींद उड़ जाती हो। और फिर वो बादशाह अल्लाह के घर काबा को मिटाने निकले। लेकिन ना आसमान से पत्थर बरसे ना जमीन फटी ना बिजली गिरी बल्कि ऐसा कुछ हुआ जो शायद तारीख का सबसे अजीब मोड़ है। वो बादशाह जो काबा को गिराने आया था वही काबा का सबसे पहला खादिम बन गया। लेकिन उसकी कौम पर एक दिन आसमान फट जाता है। सैलाब शहरों को बहा ले जाता है। और वो कौम जो कल तक गुरूर और ताकत में गुमराह हो चुकी थी। आज वही ताकत पानी में मिट चुकी थी। सवाल यह है अगर बादशाह खुद ईमान ले आया था तो फिर उसकी कौम पर ऐसा खौफनाक अज़ाब क्यों आया कि कुरान ने उनका नाम कयामत तक के लिए हलाकशुदा कौमों में लिख दिया। कौमे का ताल्लुक अरब के सबसे नीचे वाले इलाके से था। यमन तफसीर इब्न कसीर के मुताबिक एक वक्त था जब यमन दुनिया का सबसे अमीर मुल्क था। सोना पहाड़ों से निकलता था। साफ पानी दरियाओं में बहता था। शहरों के गिर्द फलों से भरे हुए बाग थे। इनके तजारती रास्ते पूरी दुनिया में फैले हुए थे। इस सल्तनत का नाम था हिमियार एंपायर। और उनके बादशाहों का लकब था तुब्बा। जैसे मिस्र के बादशाह फिरौन वैसे ही यमन के बादशाह तुब्बा। इन सब में सबसे खौफनाक, सबसे ताकतवर, एक नाम उभरता है। अबू गरीब असद तुब्बा अल हिमियारी। तफसीर के लफ्जों में है। इसकी फौज ऐसी थी कि अरब ने पहले कभी ना देखी। हाथी और घोड़ों का समुंदर। तीरंदाज, तलवारबाज और लश्कर इतना बड़ा कि पहला सिपाही शहर से निकलता तो आखिरी अभी शहर में ही होता और दुब्बा का नारा था मैं जमीन का खुदा हूं जो मेरी हुदूद में आए या तो मेरा होगा या मिट्टी का। फतेह करते यह लश्कर पहुंचता है अरब के एक खामोश इलाके में यथर्म। आज का मदीना उस वक्त सिर्फ खजूर के बागात, कुछ यहूदी कबीले और एक अजीब सी सुकून वाली हवा। तब्बा ने हुक्म दिया कल सुबह इस शहर को जला देंगे। लेकिन उस रात उसके ख्वाब में एक नूरानी शख्स आता है जो कहता है इस जमीन को छोड़ दे। यहां मेरा रसूल आने वाला है। तुब्बा घबरा कर उठता है। सुबह यत्रिप के रब्बी खुद उसके दरबार में आते हैं। ऐ बादशाह अगर तूने इस जमीन को छुआ तेरी बादशाहत का नामोनिशान मिट जाएगा। तुम मुझे धमकी दे रहे हो? मैं वो हूं जो शहरों को सांस लेने देता हूं। हम तुझे नहीं उस नबी के रब का पैगाम सुना रहे हैं जो यहां हिजरत करेगा। तफसीर इब्न कसीर के मुताबिक यह सुनकर दुब्बा के जिस्म पर लरजा तारी हो गया। उसने पहली बार महसूस किया कि कोई कुत है जो उसके तकब्बुर से भी बड़ी है। और वह पहली दफा अपनी फौज को पीछे हटाता है। मगर शैतान अभी खामोश नहीं था। कुछ लोग तब्बा के कान में फूंकते हैं। अरब के बीच एक घर है जिसे काबा कहते हैं। लोग वहां सोना चढ़ाते हैं। अगर हम इसे लूट लें तो अरब घुटनों पर आ जाएगा। टब्बा मुस्कुराया। लश्कर मक्का की तरफ मुड़ता है। लेकिन जैसे ही वह हुदूद में दाखिल होता है, तफसीर के मुताबिक तब्बा पर अचानक एक बीमारी आती है। जिस्म भूल जाता है। आंखें बाहर जुबान सूख जाती है। सांस टूटने लगती है। फौज डर जाती है। तबीब नाकाम हो जाते हैं। जादू नाकाम, दुआ नाकाम और फिर वही रब्बी आते हैं। सच बता। तेरे दिल में क्या था? इस घर को गिराना था। यह अल्लाह का घर है। इसका निगबान कोई लश्कर नहीं खुद रब्बुल आलमीन है। अगर बचना चाहता है तो अभी तौबा कर। और तफसीर के मुताबिक जैसे ही तुब्बा ने नियत बदली उसकी बीमारी गायब हो गई। तुब्बा काबा में दाखिल होता है। लेकिन बादशाह बनकर नहीं फकीर बनकर। उसकी आंखों से आंसू बहते हैं। जुबान से सिर्फ एक जुमला निकलता है। मैं गलत था। तू सही है। वो कुर्बानी देता है सिर्फ जानवरों की नहीं अपने तकुर की भी। और फिर वह हुक्म देता है और तारीख का सबसे अजीब मंजर होता है। तब्बा अपने यमन से खास कपड़ा मंगवाता है। सबसे बेहतरीन और अपने हाथों से पहली दफा काबा पर खिलाफ चढ़ाता है। काबा पर खिलाफ चढ़ाने के बाद तुब्बा ने सिर्फ तौबा ही नहीं की। बल्कि एक और काम किया। तुब्बा ने एक खत लिखा आखिरी नबी के नाम। मैं गवाही देता हूं कि आप अल्लाह के रसूल हैं। अगर मैं आपका जमाना पा लेता तो आपकी खिदमत करता। उसने यह खत यात्रीब के लोगों को दे दिया और वसीयत की और तारीख के मुताबिक यह खत नस्लों तक संभाल कर रखा गया और बाद में रसूल्लाह सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम को दे दिया गया। इस वाकया का जिक्र कुरान में नहीं आता। लेकिन तफसीर और पुरानी इस्लामी रिवायत में तब्बा का काबा को खिलाफ चढ़ाने और खत लिखने का एक मशहूर वाकया है। कुरान ने तब्बा का नाम लिया और तफसीर ने उसका किस्सा खोला। तफसीर इब्न कसीर के मुताबिक तब्बा दीन हक पर आ चुका था। वो अपनी कौम को बुलाता है लेकिन उसकी कौम आग की पूजा करती थी। बुतों को रब मानती थी। वो हंसकर कहते थे तू बूढ़ा हो गया है बादशाह। तुम लोग गुमराह हो चुके हो। अल्लाह को भुलाकर कुत्तों को सजदा करते हो। और फिर वो फैसला करते हैं। इस चीज का फैसला आग करेगी। यमन में एक रिवायत थी। पहाड़ से एक आग निकलती थी। जालिम को खा जाती थी। मजलूम को छोड़ देती थी। पूरा मुल्क जमा होता है। एक तरफ बुत, एक तरफ तुब्बा और उलमा। आग निकलती है और सीधी बुत परस्तों की तरफ जाती है। उन्हें जलाकर राख कर देती है और तुब्बा के पास आकर ठंडी हो जाती है। हक वाजे हो जाता है। तुब्बा के मरने के बाद कौम फिर शर्क में फिर जुल्म। इनकी हालत तो देखो। लगता है आज खाना नहीं मिलेगा। फिर गुनाह और फिर अल्लाह का फैसला। पहला अज़ाब खामोशी से आया। पानी कम होने लगा। बाघ पीले होने लगे। जानवर गिरने लगे। यह बस मौसम है। हर साल होता है। अल्लाह का अज़ाब नहीं। लेकिन दिन गुजरते गए और पानी वापस नहीं आया। बादशाह ने कहा था शायद यह रब का गुस्सा हो सकता है। बादशाह कमजोर हो गया था। हम अभी ताकतवर हैं। हमें किसी रब की जरूरत नहीं। यह वो जुमला था जिसके बाद अल्लाह के अज़ाब का वक्त आ गया। फिर एक दिन आसमान फट गया। पहाड़ों से पानी आया नहरों की तरह नहीं दीवार की तरह शहरों के शहर बह गए। महल मिट्टी बन गए। जहां सोना था वहां जिस्म तैर रहे थे। या अल्लाह। बस एक मौका और दे दे। बादशाह सही था। अज़ाब आ गया। बचा लो। अपने खुदा को बुलाओ। जिस खुदा को बुला रहे थे वो खुद मिट्टी बन चुका था। कुरान ने सिर्फ इतना कहा हमने कौमे को हलाक कर दिया। क्योंकि वो मुजरिम थे। ना उनका नाम बचा ना निशान ना नस्ल सिर्फ वाकिया और सिर्फ वार्निंग जिस कौम ने कहा था हमें कोई नहीं मिटा सकता आज उनका पता भी नहीं कि वो जमीन के किस हिस्से में दफन है। यह वाकया सिर्फ यमन का नहीं। यह वार्निंग है हर कौम और उस बादशाह के लिए जो अपनी ताकत को खुदा समझ लेता है। आज हमें लगता है वेपन्स और सुपर पावर होना सब कुछ है। एआई सब कुछ है। दौलत सब कुछ है। लेकिन कल यह सब भी यमन के महलों की तरह सिर्फ रेत बन जाएगा। इस वाकया से आपने क्या सीखा अभी कमेंट्स में बताइए और वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब करिए।

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a month ago
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