एक आदमी रोज़ मंदिर के बाहर बैठकर भगवान से एक ही सवाल पूछता था— “जब सब पहले से लिखा है, तो कोशिश क्यों करूँ?” दिन बीतते गए… भगवान चुप रहे। एक शाम वो आदमी पहाड़ के रास्ते से जा रहा था। अचानक पाँव फिसला… और वो गिरने ही वाला था। उसी पल उसके हाथ में एक रस्सी आ गई। वो बच गया। उसने ऊपर देखा और कहा— “भगवान, ये रस्सी आपने भेजी?” जवाब आवाज़ में नहीं आया, पर दिल में उतर गया— “रस्सी पहले से थी, हिम्मत मैंने दी।” उस दिन उसे समझ आ गया— किस्मत मौके देती है, पर उन्हें पकड़ना हमें ही पड़ता है।