"इस समाज की सबसे बड़ी त्रासदी ये नहीं है कि लोग पागलपन को नहीं समझते... बल्कि ये है कि वो मूर्खता को सामान्य मान बैठे हैं। यहाँ जो सबसे ऊँचा चिल्लाए, वही सबसे ज़्यादा सुना जाता है — चाहे उसके शब्दों में ज़रा भी सच्चाई न हो। सोचने वाले लोग सवाल करते हैं, और इस समाज को सवाल पसंद नहीं… उन्हें चुप रहने वाले, झुकने वाले, और बिकने वाले लोग चाहिए। यहाँ इंसान का मूल्य उसके विचारों से नहीं, उसके फॉलोअर्स की गिनती से तय होता है। सच बोलो तो तुम ‘नेगेटिव’ कहलाते हो, और झूठ को 'पॉज़िटिव वाइब्स' कहकर पूजते हैं लोग। यह समाज तुम्हें तब तक स्वीकार करेगा जब तक तुम उनकी मूर्खता में शामिल रहोगे, लेकिन जैसे ही तुम अलग सोचने लगते हो – तुम ‘पागल’ बन जाते हो!"