एक छोटे से गाँव में मोहन नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसकी पूरी दुनिया उसकी छोटी-सी जमीन और उसका परिवार था—पत्नी सीता और एक छोटा बेटा। लेकिन पिछले दो सालों से मानसून ने जैसे गाँव से मुँह मोड़ लिया था। बारिश की एक-एक बूँद के लिए तरसते खेतों में दरारें पड़ चुकी थीं। फसलें बर्बाद हो गईं और मोहन के घर का चूल्हा जलना भी मुश्किल होता जा रहा था।