"कभी-कभी लगता है... मोहब्बत वो नहीं जो मुकम्मल हो जाए, मोहब्बत तो वो है, जो अधूरी रह कर भी दिल में पूरी रहे।" (म्यूजिक थोड़ा तेज होगा, फिर धीमा) आवाज: "तुम्हें याद है? वो शाम, जब बारिश की बूंदें तुम्हारी ज़ुल्फ़ों से टकरा रही थीं... मैंने चाहा था कुछ कहना, पर लफ्ज़ कहीं खो गए थे। शायद, खामोशी में ही हम एक-दूसरे को सबसे ज़्यादा सुन रहे थे।" (थोड़ा ठहरें - 2 सेकंड का ब्रेक) "मैंने आज फिर वो पुराना संदूक खोला है, जिसमें तुम्हारे नाम के कई खत दबे पड़े हैं। कुछ में तुम्हारी तारीफ के कसीदे हैं, तो कुछ में बस तुम्हारा नाम लिखा है... पन्नों के कोनों पर। लोग कहते हैं कि वक्त के साथ सब धुंधला हो जाता है, पर मेरी डायरी के उन सूखे फूलों में, आज भी तुम्हारी खुशबू वैसी ही ताज़ा है।" (म्यूजिक थोड़ा इमोशनल मोड़ लेगा) "ये मोहब्बत भी बड़ी अजीब चीज़ है, न तुम पास हो, न तुम दूर हो... बस एक एहसास बनकर रगों में बह रहे हो। अजीब है न? तुम्हें खोकर भी, मैंने तुम्हें खुद में संभाल कर रखा है। जैसे कोई अधूरी नज़्म, जिसे पूरा करने की चाहत ही उसकी खूबसूरती है।" (आखिरी हिस्सा - धीमी और गहरी आवाज) "तो ये खत भी आज मैं अधूरा ही छोड़ रहा हूँ... ताकि किसी और शाम, तुम्हें याद करने का एक और बहाना बचा रहे। सिर्फ तुम्हारा... अधूरे खत।"