जब सरस्वती माता आकाश में वीणा लेकर उड़ीं, तो जहां-जहां उनकी धुन गूंजी, वहां ज्ञान की वर्षा होने लगी। जब दुर्गा माता अपने सिंह पर सवार होकर उड़ीं, तो हर दिशा में शक्ति की वर्षा होने लगी।