Ranajit

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दुनिया की तरह हम भी टुकड़ों में बिखरे थे हम हमेशा इतने अकेले नहीं थे, हमें छोड़ दिया गया था वो यादें दिल से मिटती नहीं और नींद भी रात को नहीं आती तो ये सपने क्यों लौट आते हैं? ये सपने क्यों लौट आते हैं? वो ही आँखें जो कभी तेरे प्यार में डूबी थीं तुमने उन्हें अनगिनत आंसुओं से भर दिया अनगिनत आंसू कम से कम ये तो अच्छा है कि हम अपनी जान नहीं गंवाए कम से कम ये तो अच्छा है कि मना करने के बहाने में... बार-बार मना करने के बहाने में... मैंने अपना दिल वहीं दिया जहाँ प्यार करना मना था मैंने सिर झुकाया उस जगह जहां सिर झुकाना मना था क्यों मैंने अपनी ज़िन्दगी के परदे खोले जहां एक भी पल बाँटना मना था? क्यों मैं उस गली में रहा, जहां रोज़ चलना मना था? जैसे पूरी दुनिया टूटी हुई थी, हम भी बिखरे हुए थे हम हमेशा इतने अकेले नहीं थे, हमें छोड़ दिया गया था वो ही होंठ जो कभी मेरे लिए दुआएं करते थे बाद में मेरे खिलाफ कड़वे शब्द बोले कभी अकेले बैठो, एकांत में और अपने सामने रखो वक्त का आईना जो चेहरा दिखेगा शायद धीरे से मुस्कुराएगा, तुम्हें बेवफा कहकर बुलाते हुए मैंने तुम्हें अपना दिल दिया, बस फेंक दिया गया याद रखना, तुम्हारे पास भी दिल है मैंने तुम्हें अपना दिल दिया, बस फेंक दिया गया याद रखना, तुम्हारे पास भी दिल है मैंने अपना दिल जला दिया वहाँ जहाँ दीपक जलाना भी मना था मैंने हिम्मत करके उस चेहरे को याद किया जिसे याद करना मना था उसने मेरा दिल टटोला, फिर भी मुझे उसे टटोलना मना था मैंने अपना दिल उसी जगह दिया जहाँ प्यार करना मना था जैसे दुनिया ही टूटी हुई थी, हम भी बिखर गए हम हमेशा इतने अकेले नहीं थे, हमें छोड़ दिया गया था वही होंठ जो कभी मेरे लिए दुआ करते थे बाद में मुझ पर कड़वी बातें कही।

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