मेरे प्यारे बेटे शुभम, तुम्हारा बहुत शुक्रिया। तुम्हारे सहयोग से मैं अपने गंतव्य तक पहुँच गया हूँ। शुभम, तुम मुझसे नाराज मत होना, मैं आने से पहले तुम्हें कुछ बोल नहीं पाया, बता नहीं पाया। क्योंकि मुझे पता है कि तुम सबकुछ जानते हो, तुम इतने समझदार हो कि तुम्हें पता है कैसे सबकुछ संभालना है। मुझे पता है मेरा बेटा डॉ. शुभम सिंह एक ब्रांड है और मेरा ब्रांड परफेक्ट है। तुम बस सुरभि को भी शौर्या जैसा ही समझना बेटा। अब मेरी पत्नी, मेरी बेटी, मेरी बहू और मेरा पोता सबको तुम्हें संभालना है और खुश रखना है। इन सबके बीच तुम्हें अपने आप को सबसे ज्यादा संभालना है। मैं तुमसे दूर नहीं हूँ, तुम सबके आसपास हूँ। तुम इतना समझो कि मैं तुम्हारी सारी परेशानी और सारे संघर्ष अपने साथ ले आया हूँ। धीरे-धीरे सबकुछ अच्छा हो जाएगा। मेरा प्यार और आशीर्वाद हमेशा तुम सबके पास है बेटा। और सुरभि, तुम जितना प्यार और सम्मान मेरा करती थी अब उतना प्यार और सम्मान अपने भाई का करना बेटा, वो दिखा नहीं पाता है लेकिन वो तुमको मानता तो अपने बच्चे जैसा ही है। मेरी अंतिम इच्छा यही थी कि तुम दोनों भाई-बहन एक होकर रहो। तुम दोनों से मेरी पहचान है बचे। तुम दोनों जितना एक दूसरे के साथ रहोगे, मैं यहाँ उतना ही खुश और संतुष्ट रहूँगा। मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम सबके साथ है। खूब खुश रहो, खूब बढ़ो, खूब तरक्की करो। अपना ख्याल रखो।