और तभी उसकी नज़र... एक छोटे से कोकून पर पड़ी... ... उस कोकून के भीतर... एक तितली जन्म लेने की तैयारी कर रही थी... वह बाहर निकलना चाहती थी... लेकिन रास्ता बहुत संकरा था... बहुत कठिन था... ... तितली पूरी शक्ति से प्रयास कर रही थी... बार-बार... फिर बार-बार... लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी...