कल्पना कीजिए... [calm, reflective] सूरज चमक रहा है... चारों तरफ रोशनी की बाढ़। [warm, vivid] आप चल रहे हैं... और आपकी अपनी परछाई... बिल्कुल आपके साथ कदम मिलाकर चल रही है। [gentle] हर कदम पर... साथ। [pause] [slow, somber] लेकिन जैसे ही शाम ढलती है... सूरज डूबता है... और अंधेरा घना होने लगता है... [sad, fading] वो परछाई धीरे-धीरे फीकी पड़ जाती है। [heavy pause] फिर एक पल में... पूरी तरह गायब। [sorrowful, quiet] अकेला छोड़कर। [pause] [thoughtful, serious] तो सवाल ये है... क्या इंसान भी ठीक वैसा ही होता है? [reflective] ज्यादातर लोग आपके साथ तभी तक हैं... जब तक सफलता, हँसी-खुशी और फायदा का सूरज चमक रहा हो।