“आदरणीय मंच, और मेरे सामने बैठे मेरे अपने लोगों… आज मैं आपसे कोई कहानी नहीं, अपनी सच्चाई साझा करने आया/आई हूँ। कभी-कभी ज़िंदगी इतनी खामोश हो जाती है कि शोर सिर्फ़ दिल के अंदर सुनाई देता है। हम मुस्कुराते हैं… क्योंकि दुनिया को मजबूत लोग पसंद हैं, लेकिन सच ये है कि हर मुस्कान के पीछे एक लड़ाई छुपी होती है। हममें से कई लोग ऐसे हैं जो रोज़ हार कर भी अगली सुबह उठते हैं। जिन्होंने अपनों से कम, और हालात से ज़्यादा चोट खाई है। फिर भी… हम रुके नहीं। क्योंकि रुकना हमें आता ही नहीं। लोग कहते हैं— ‘सब ठीक हो जाएगा।’ लेकिन कोई ये नहीं पूछता कि अभी कैसा लग रहा है? आज मैं उन सबके लिए बोल रहा/रही हूँ जो चुपचाप सब सह लेते हैं। जो रात को आँसू पोंछकर सुबह फिर से दुनिया का सामना करते हैं। याद रखना… टूटना कमजोरी नहीं है। कमजोरी है हार मान लेना। और हम में से कोई भी हारा नहीं है, क्योंकि जो आज यहाँ खड़ा है, वो अब तक सब कुछ सह चुका है। अगर आज तुम्हें लग रहा है कि कोई तुम्हें नहीं समझता, तो मेरी बात याद रखना— तुम अकेले नहीं हो। और जो दर्द आज तुम्हें मजबूत बना रहा है, वही कल तुम्हारी पहचान बनेगा। मैं भरोसा दिलाता/दिलाती हूँ, अंधेरी रात चाहे कितनी भी लंबी हो, सुबह ज़रूर आती है। और जिस दिन तुम खुद पर विश्वास कर लोगे, उस दिन दुनिया को भी करना पड़ेगा। धन्यवाद… खुद पर भरोसा बनाए रखिए। 🙏”
