कल याने 6 अप्रेल को तमिलनाडू में बहुत ही historical और rare फैसला सुनाया गया जिसमें 9 पुलीस वालों को फासी की सजा सुनाये गई कोट ने इसे rarest of the rare case कहा और ये फैसला स्थाना कुलम custodial death case के बारे में था और पुलीस वालों को ये आदेश दिया गया कि जो मृतक हैं उनके परिवार को 1 करोड 40 लाग का मुआवज़ा देना है और अगर ये नहीं करते हैं तो उनकी property को बेच कर भी ये मुआवज़ा दिया जाएगा। तो मैंने सुचा कि इतना बड़ा फैसला कोड ने कैसे सुना है क्योंकि हमारे सिस्टम में ज्यादातर पुलिस वाले कोई भी अपरात करके बच जाते हैं तो थोड़ा रिसर्च करने पर पता चला तो ये जो केस है वो तमिल लाडू के साहना कुलम का केस है कोविट के टाइम की बात है जून 2020 उस समय गाइडलाइन्स थी कि आप एक सर्टेन टाइम के बाद अपनी दुकाने खोल के नहीं रख सकते हो तो जैराज 59 years old और उनका बेटा बेनिक्स 31 years old उनकी mobile shop थी और उन्होंने तै समय से जादा time तक अपनी mobile shop खोल के रखी थी पुलिस वाले वहाँ जाते हैं जैराज को याने पिता है उनको लेके जाते हैं अपने थाने बेनिक्स भी वहाँ पहुँच जाता है फिर इन दोनों बाब बेटे के कपड़े उतार कर पूरी रात उन्हें थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया जाता है मतलब ये दस के दस पुलिस वाले डंडे से उन्हें इतना पीटते हैं कि पूरा थाना खुना खुन हो जाता है टेबल डंडे हर जगे सिर्फ खुन ही खुन ये दोनों अपनी जान की दूआ माँग रहे थे माफी माँग रहे थे कि छोड़ दो पर इन पुलिस वालों के उनके उपर दया नहीं इनके परिवार वालों का कहना है कि उस रात उन्हें उतना पिटा गया कि इनको बार-बार कपड़े बदले पड़ रहे थे, खून इतना बहरा था, कपड़े खराब हो जा रहे थे, साथ बार उन्हें लूंगी बदली और इतना इनका खून बहा कि इनके लंग्स और इंटरनल ओगन्स ने काम करना भी बंद कर दिया था, आप सोचो इतना टॉर्चर, इसके इसके बाद 20 चून को सुबह को जब इन बाब बेटे को कोड ले जाया गया तो जुडिशियल मजिस्ट्रिट ने सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से इन्हें देखा तक नहीं और इन्हें जेल भेज दिया जबकि इनकी जो हालत थी वह हॉस्पिटल में एडमिन होने के लाइक थी वह चल भी नहीं पा रहे थे उन्हें देखा नहीं गया इनके साथ क्या हुआ यह कुछ पूछा नहीं गया और इन्हें जेल भेज दिया गया फिर वहां जब इनकी तब्बत बिकड़ने लगी तो इन्हें हॉस्पिटल लेकर जाया गया और वहां डॉक्टर ने भी सा ये नहीं बोला कि इनकी हालत इतनी ज़्यादा खराब है। फिर कुलमला के 22 जून को बैनिक्स ने दम दोड़ दिया और 23 जून को उनके पिता ने भी दम दोड़ दिया ओवर ब्लीडिंग के वज़ेसे और औरगन फिल्यास के वज़ेसे। इसके बाद जब इन दोनों का पोस्टमॉर्टम किया गया तो बहुत ज़्यादा चोटो के थर्ड डिग्री टॉर्चर के प्रूफ्स मिले। ये मामला बहुत ज़्यादा तूर पकड़ता है उसके बाद। फिर तो पुलिस वालों ने अपने थाने के सारे CCG फुटेज को भी डिलीट किया, प्रूफ्स मि लेडी जो एक constable थी उन्होंने गवाही दी और ये बहुत ज़्यादा मुख्य बूमिका निभाई इस गवाही ने और उन्होंने ये माना कि वहाँ पे पूरे थाना खूना खून हो चुका था और बहुत ज़्यादा इनके साथ third degree torture किया गया उस समय इमामला इतना ज़्यादा बढ़ गया था कि मदरास हाई कोर्ड ने खुद इसका संग्यान लिया पहले के CID को दिया गया फिर CBI को दिया गया और उन्होंने अपनी जाच में ये बात को माना कि इन 10 पुलिस वालों ने बहुत ज़्यादा अती की इसके साथ इसलिए इन लोगों की मौत हुई इसके बाद CBI ने 2000 पन्नों की चार्शिट फाइल की और उस पुलिस कॉंस्टिबल की गवाई की वज़े से कुलमिला के इन 10 पुलिस वालों के खिलाफ मामला दर्च किया गया और एक पुलिस वाले की इस COVID के दौरान ही बिमारी के दौरान मौत हो गई तो अभी इन 9 पुलिस वालों को फासी की सजा सुनाई गई। अब बेशक बैनिक्स और जेराज वापस नहीं आ सकते, बढ़ूट के परिवार वालों को खुशी है कि एट लिस्ट उन्हें फाइनली न्याय मिला, जस्टिस मिला, और आगे के परिवारों को इस अब नहीं देखना पड़ेगा, अब इस कोट केस के बाद पुलिस वालों को भी डर रहेगा कि हम जो चाहे नहीं कर सकते, आगे से उन्हें पता है कि कानून और लॉ उनके लिए भी उतना ही है जितना आम लोगों के लिए, इस वीडियो के बारे में आपका ओपिनियन मुझे नीचे कॉमेंट सेक्शन में जरूर बताएगा, वीडियो को लाइक और श