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@Abhishek Prajapati
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इंग्लिश चैनल टनल नाइन्टीन सेंचुरी का इंसानों द्वारा बनाया हुआ दुनिया का सातवां अजूबा है। पहाड़ियों ओर जमीन के अंदर से टनल बनाना शायद बच्चों जैसा काम है इस चैनल टनल के सामने। इंग्लिश चैनल टनल जिसको यूरोटनल भी बोलते हैं समुद्र के पानी के नीचे बनी हुई फिफ्टी किलोमीटर लंबी लोंग टनल है। यदि वर्ल्ड मैप से देखे तो यह फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम है और इन दोनों कंट्री को आपस में कनेक्ट करने के लिए बीच में समुद्र के पानी के नीचे से इंग्लिश चैनल टनल को बनाया गया है। जहां से हाई स्पीड ट्रेन वन सिक्सटी किलोमीटर पर आवर की स्पीड से पास हो सकती है। इस टनल को बनाने के लिए डाइरेक्ट गवर्नमेंट ने फंडिंग नहीं की बलकि पब्लिक फंडिंग से इसको बनाया गया और यह अब तक का सबसे कोस्टली इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट भी है जिसकी लागत लगभग सेवन बिलियन डॉलर थी। टनल बनाने से पहले ही यह डिसाइड कर लिया गया कि इस टनल से किस टाइप का ट्रांसपोर्ट चलेगा उसी के हिसाब से टनल को फिर डिजाइन किया गया। UK एंड फ्रेंच गवर्नमेंट के एग्रीमेंट के बाद जियोलॉजिकल इन्वेस्टिगेशन की गई जिससे पता चला कि सीबेड के नीचे मल्टिपल लेयर है मिट्टी की जिसमें सबसे ऊपर एक लेयर मिली ग्रे चॉक की जिसके अंदर पानी की वजह से काफी ज़्यादा दरारे और क्रेक्स थे जो टनल बनाने के हिसाब से बिल्कुल भी परफेक्ट नहीं थी। इसके नीचे एक और लेयर मिली जो चॉक माल की थी और यह लेयर ऊपर की लेयर से काफी ज़्यादा स्टेबल है। यह लेयर कम परमीयबल है, क्रेक्स और दरारे भी आलमोस्ट ना के बराबर है। चॉक माल में मोस्टली कैलसियम कार्बोनेट होता है जिसके बने चॉक हमारे स्कूल में आज भी शायद यूज होते हैं। तो यह फत्तर जितना स्ट्रॉंग तो नहीं है जिसकी वजह से पानी के हाई प्रेशर के सामने यह लेयर भी एक रिस्क तो है लेकिन इससे ज़्यादा सेफ कोई भी लेयर नहीं थी। यह लेयर सीबेड से 35 से 45 मीटर नीचे है। 1988 में जब टनल बनाना स्टार्ट हुई तो दोनों कंट्री ने डिसाइड किया कि वह अपनी-अपनी साइड से टनल बनाना स्टार्ट करेंगे और एक सेंट्रल पॉइंट पर मिल जाएंगे। यहाँ पर सबसे इंटरेस्टिंग बात यह थी कि टोटल तीन टनल एक साथ में बनाए जाएंगे जिसमें दो रेलवे टनल होंगे और एक सर्विस टनल होगी। और इन तीनों टनल को एक साथ में ही बनाया जाएगा। टनल बनाने के लिए टनल बोरिंग मशीन बनाई गई जिनको टीबीएम बोलते हैं। टीबीएम हेड में कटिंग डिस्क लगे रहते हैं जो मिट्टी को काटने का काम करते हैं। टीबीएम की डीटेल वर्किंग को आप इस वीडियो से समझ सकते हो लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा। यहाँ पर दोनों साइड में रेलवे की टनल का डायमीटर 7.6 मीटर है और बीच की सर्विस टनल का डायमीटर 4.8 मीटर है। सबसे पहले सर्विस टनल को बनाना स्टार्ट किया गया यह टनल रेलवे टनल से कुछ मीटर की दूरी पर आगे रखी गई जिसका परपज था कि साथ में जियोलॉजिकल इन्वेस्टिगेशन भी की जा सके साइड में दो रेलवे मेन टनल के लिए। इस टनल की टोटल लेंथ 50 किलोमीटर है जबकि यह सीबेड के नीचे 38 किलोमीटर है। और जैसे ही टनल बोरिंग मशीन सीबेड के नीचे पहुंची तो यहां से चैलेंजेस आना स्टार्ट हो गए। टीबीएम का कटर हेड चोक माल को कट करता है और स्क्रू कन्वेयर की हेल्प से इस कचरे को बाहर कन्वेयर बेल्ट तक पहुचाया जाता है और कन्वेयर बेल्ट इसको बाहर लेकर जाता है। अरे ये क्या हुआ मसीन आराम से चल रही थी फिर भी टनल कोलैप्स कर गई। और यही सबसे बड़ा चैलेंज था इंजीनियर्स के सामने। यूरो टनल में अर्थ प्रेशर बैलेंसिंग टीबीएम यूज हुए समंदर के नीचे पानी का काफी ज़्यादा प्रेशर रहता है। तो एक बार आपने टनल बनाना स्टार्ट कर दिया तो आप उसको बीच में नहीं छोड़ सकते और आपको कमप्लीट टनल एक साथ में बनाते हुए आगे बढ़ना होगा। टीबीएम के हेड पर पानी का जबरदस्त प्रेशर आ रहा है और टीबीएम के हेड के जस्ट पीछे एक्क्वेशन चेंबर है जहां पर टीबीएम हेड चोक माल को कट करने के बाद में इसमें स्टोर करता रहता है। अब मान के चलते हैं टीबीएम के हेड पर 2 बार का प्रेशर आ रहा है पानी की वजह से अब इंपोर्टेंट है कि टीबीएम का हेड भी वापस टनल के फेस पर 2 बार का प्रेशर मेंटेन करे अदरवाइज टनल कोलैप्स कर जाएगी। तो इसके लिए एक्क्वेशन चेंबर में चोक माल के कचरे को भर के रखा जाता है ताकि टीबीएम का हेड पानी के प्रेशर को बैलेंस कर सके। जब एक्क्वेशन चेंबर में 2 बार से ज़्यादा प्रेशर बढ़ जाएगा तो इसको रोटरी स्क्रू कनवेयर से बाहर निकाला जाता है और कन्वेयर बेल्ट तक पहुँचाया जाता है और कन्वेयर बेल्ट इसको मसीन के एक्जिट तक पहुँचाता है जहां से आगे ट्रक और ट्रेन से ट्रांसपोर्ट कर दिया जाता है। गजब हो गया फिर से टनल कोलैप्स कर गई क्योंकि यहाँ पर आता है चैलेंज नंबर 2। इसी तरीके से दोस्तों लाइफ भी बहुत चैलेंजिंग है जब तक हमारे पास में कोई अच्छी स्किल ना हो पर 3D एनिमेशन की स्किल आपकी ये प्रॉब्लम सॉल्व कर सकती है और रिसेंटली हमने एडवांस 3D एनिमेशन का कोर्स लॉच किया है जहां पर आप हर टाइप का एनिमेशन सीखते हैं। साथ में आपको एक बेहतरीन 3D कम्यूनिटी भी मिल जाती है जहां लोगों के बीच में रहकर आप अपने आपको और ज़्यादा पॉलिश कर पाओगे। डिस्क्रिप्शन में डिटेल्स अवेलेबल है जरूर से जॉइन कीजिएगा आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। अब वापस टॉपिक पर आते हैं। हमने फ्रंट साइड के प्रेशर को तो बैलेंस कर लिया लेकिन टनल बनाने के बाद में इसको हम ऐसे नहीं छोड़ सकते अदरवाइज़ पानी के प्रेशर की वज़ेसे मिट्टी में दरारे बननेलगेंगी और टनल कोलैप्स कर जाएगी। तो जरूरी है कि टनल को पूरा कमप्लीट करते हुए ही आगे बढ़ा जाए और इसके लिए बनाए गए हेवी स्पेशल रीइंफोर्स्ड कंक्रीट रिग जिसके अंदर आयरन के रोड डाले गए और यह कंक्रीट रिग न्यूक्लियर पावर प्लांट में यूज होने वाले रिग से भी ज्यादा हेवी है। इन हेवी ब्लॉक को मशीन के पास में पहुंचाया गया और मशीन के हेड के पीछे सेगमेंट इरेक्टर लगे रहते हैं जो इन ब्लॉक को वन बाय वन उठाते हैं और टनल बनाना स्टार्ट करते हैं। जब पूरी कंप्लीट रिंग बनकर तैयार हो जाती है तो यहाँ पर थ्रस्ट सिलेंडर लगे रहते हैं जो टनल हेड को आगे की तरफ फोर्स लगाते हैं। टनल लाइनिंग पर बने रहने के लिए टनल लाइनिंग का मतलब है जिस पाथ पर टनल को बनाना है उस पर टनल हेड को मेंटेन करने का काम यह हाइड्रोलिक थ्रस्ट सिलेंडर ही करते हैं। लेकिन यदि आप ध्यान से देखोगे तो यहाँ पर एक छोटी प्रॉब्लम फिर से आती है। यह कंप्लीट हुई टनल और हेड के बीच में फिर से यहाँ पर थोड़ा सा गेप है और यदि चोकमाल में दरारे क्रिएट हो गई और इधर से पानी आने लग गया तो टीबीएम का पूरा इलेक्ट्रॉनिक्स या तो खराब हो जाएगा या फिर टनल ही कोलेप्स कर सकती है। तो यहाँ पर टीबीएम के चारों तरफ एक शील्ड प्रोवाइड करवाई जाती है जो टनल को कोलेप्स होने से प्रोटेक्ट करके रखती है। लेकिन यहाँ फिर से नए चैलेंजेज आना स्टार्ट होते हैं। यूके साइड के टीबीएम अच्छे से स्पीड में चल रही थी लेकिन फ्रेंच साइड के टीबीएम स्ट्रगल कर रही थी क्योंकि एक तो यह टीबीएम डेप्थ में थी जिसको फिर भी मैनेज किया जा सकता है। लेकिन बड़ा चैलेंज था चोकमाल फ्रेंच साइड में टीबीएम के सामने चोकमाल में ज्यादा दरारे थी जिसकी वजह से यहाँ पर एक कीचड़ जैसी सिचुएशन बन गई और पानी का प्रेशर भी ज्यादा बढ़ने लगा। अब ऐसी कंडीशन में टीबीएम चल तो सकती है लेकिन टनल कोलेप्स होने के बहुत ज्यादा हाई चांस रहते हैं। दोनों साइड के टीबीएम सेम ही तरीके से काम करते थे लेकिन फ्रेंच साइड में सलरी टीबीएम को यूज किया गया इस कंडिशन से बचने के लिए। इस टीबीएम में बेन्टोनाइट क्ले वॉटर और पॉलिमर को मिक्स करके टीबीएम के कटर हेड से टनल फेस पर प्रेशर से भेजा गया। अब यह मिक्सर जितनी भी दरारे और क्रेक्स थे उनको बंद कर देगा जिससे पानी रुक जाएगा और टीबीएम के फ्रंट साइड में एक फिल्टर केक बनना इस्टार्ट होगा जिससे वॉटर लीकेज की कम्प्लीट प्रॉब्लम खतम हो जाएगी और फिर टीबीएम का हेड कटिंग करता जाएगा और मशीन आगे बढ़ने लगेगी। यूके साइड और फ्रेंच साइड में ब्लॉक्स को एक दूसरे के साथ में टाइट करने के लिए अलग-अलग मेकेनिज्म यूज हुआ: एक साइड में लॉकिंग मेकेनिज्म यूज हुआ। तो दूसरी साइड में बोल्ट से इनको टाइट किया गया। अब यहाँ पर यह कंक्रीट रिग फिर से प्रॉब्लम है। हमने टेम्परेरी तो टनल बनाने के लिए लीकेज को रोक दिया लेकिन इस कंक्रीट रिग के बीच में काफी ज्यादा गेप है जहां से पानी का रिसाव हो सकता है। तो इस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए नियोप्रोन एंड ग्राउट शील्ड बोल्टेड लाइनिंग यूज की गई। जब टीबीएम आगे बढ़ती है तो इसकी शील्ड की वजह से यहाँ पर हल्का सा गेप रहता है और इस गेप के अंदर ग्राउट को टीबीएम बढ़ते हुए आगे बढ़ती है जिससे कंक्रीट रिग के बीच में जो भी गेप था वह फिल होता जाएगा और इस तरीके से एक स्ट्रॉंग वाटरप्रूफ टनल बनती जाएगी। अब मशीन दोनों साइड से चल रही है और एक परफेक्ट पॉइंट पर दोनों टनल मैच करना फिर से एक बड़ा चैलेंजिंग टास्क है। इसके लिए एडवांस सर्वेइंग टेक्निक काम में ली गई जिसमें ट्रायंगल नेटवर्क बनाए गए, जाइरोस्कॉपिक गाइडेंस सिस्टम यूज होता है, जीपीएस और सैटेलाइट डेटा यूज होता है और सी लेवल पर पॉइंट्स बनाए गए। यह एडवांस सर्वेइंग टेक्निक सेपरेट टॉपिक है, अभी हम इसके बारे में डिस्कस नहीं करेंगे। लेकिन इस एडवांस सर्वे से जब दोनों साइड के टनल एक पॉइंट पर मिले तो आप जानकर हैरान रह जाओगे सिर्फ 2 सेंटीमीटर की एरर आई, बाकी 99.9 पर्सेंट दोनों टनल एकदम परफेक्टली मैच हुई। मुझे इतना शानदार रिजल्ट देखकर अपने इंडिया के इंजीनियर्स पर थोड़ी दया आने लगी। अभी रिसेंटली एक गोखले ब्रिज बनाता मुंबई में जो बर्फी वाला ब्रिज से खुले आसमान के तले मैच नहीं हुआ। इसमें इंजीनियर्स को इतना ट्रोल करने की क्या जरूरत थी सिर्फ 2.8 मीटर का ही तो मिसमैच हुआ था। हम भी गजब ही कर देते हैं कभी तो। अब यहाँ पर दोनों साइड की टनल एक जगह पर मैच तो करेगी लेकिन हम दोनों साइड की टीबीयम को एक साथ एकदम पास में नहीं ला सकते ड्रिल करते हुए। तो यूके साइड की टीबीयम को कुछ दूरी पहले ही रोक दिया गया और फ्रेंच साइड की टीबीयम आगे बढ़ती गई। लेकिन सबसे जरूरी यह था कि जब आप यूके साइड की टीबीयम को पीछे की तरफ ले रहे हो तो आपको टनल के फेस को सील करना होगा, अदरवाइज वाटर प्रेशर से टनल कोलेप्स हो सकती है। जब फ्रेंच साइड की टीबीयम फाइनल टनल को कनेक्ट करने वाली थी तो टीबीयम के प्रेशर की वजह से यह छोटा सा एरिया कोलेप्स कर सकता है। तो यहाँ पर टीबीयम के प्रेशर को क्लोजली कंट्रोल किया गया ताकि कहीं से भी टनल कोलेप्स न हो जाए और फाइनली दिसम्बर 1990 को दोनों टनल को कनेक्ट कर दिया गया। अब यहाँ से इन टीबीयम मशीनों का काम कम्प्लीट हो गया तो इन मशीनों ने मेकेनिकल सुसाइड कर लिया क्योंकि इस प्वाइंट से इन मशीनों को बाहर निकालने की कोश्टिंग ज्यादा थी। तो फिर टीबीयम को यहाँ से नीचे की तरफ चलाया गया और परमानेंटली इनको यहीं पर दफना दिया गया। अब मशीन के कुछ इंपोर्टेंट पार्ट थेजो रियूजेबल थे, उनको निकाल लिया गया। लेकिन इन दोनों साइड की टनल को बनाने के लिए टोटल इलेवन टीबीयम काम में लिए गए जिनमें से 5 को जमीन में ही दफना दिया गया। इनमें से पाँच को जमीन में ही दफना दिया गया। टनल के अंदर दो क्रॉसओवर भी बनाए गए, जिसमें दोनों रेलवे टनल को कंबाइन कर दिया गया और सर्विस लाइन को साइड में से निकाला गया। नॉर्मल कंडीशन के अंदर ये क्रॉसओवर बड़े स्टील गेट से सेपरेटेड रहते हैं और इमरजेंसी सिचुएशन में इनको यूज किया जा सकता है.

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