कल्पना कीजिए एक ऐसी रात — जब आसमान खामोश था, ज़मीन कांप रही थी, और एक पूरी कौम अपने अंजाम की तरफ बढ़ रही थी। एक तरफ था वो बादशाह — जिसने खुद को खुदा कहा। जिसके महल सोने से सजे थे, जिसकी फौज लाखों में थी, जिसकी एक आवाज़ पर हजारों सिर झुक जाते थे। और दूसरी तरफ था एक इंसान — बिना तख़्त के, बिना फौज के — सिर्फ एक लाठी हाथ में, और अल्लाह पर यकीन दिल में। यह कहानी है दुनिया की सबसे बड़ी ताकत के सबसे बड़े अंजाम की। यह कहानी है फिरऔन की — और उस अज़ाब की जो अल्लाह ने उस पर नाज़िल किया।