एक बड़े शहर के बस स्टैंड के पास रामू नाम का एक गरीब लड़का रहता था। रामू दिन भर बसों में चढ़कर लोगों से पैसे मांगता और उसी से अपना पेट भरता था। सुबह से शाम तक उसकी जिंदगी बस एक ही काम में गुजरती थी — लोगों से भीख मांगना। कुछ लोग उसे पैसे दे देते… कुछ लोग उसे डांटकर भगा देते। लेकिन रामू के पास कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था। एक दिन दोपहर के समय वह एक बस में भीख मांग रहा था। तभी उसकी नजर खिड़की के पास बैठे एक बुजुर्ग आदमी पर पड़ी। वह साफ कपड़े पहने हुए था और काफी समझदार लग रहा था। रामू उसके पास गया और बोला — “साहब… कुछ पैसे दे दीजिए, भगवान आपका भला करेगा।” बुजुर्ग आदमी ने रामू की तरफ देखा और पूछा — “तुम हमेशा लोगों से मांगते ही रहते हो?” रामू बोला — “हाँ साहब… मैं गरीब हूँ, मांगकर ही पेट भरता हूँ।” बुजुर्ग आदमी हल्का सा मुस्कुराया और बोला — “लेकिन क्या तुमने कभी किसी को कुछ दिया है?” रामू हैरान हो गया। “साहब… मैं तो खुद भिखारी हूँ… मैं किसी को क्या दे सकता हूँ?” बुजुर्ग आदमी बोला — “याद रखना… इस दुनिया में वही इंसान पाता है जो पहले देना सीखता है।” इतना कहकर वह आदमी बस से उतर गया। लेकिन उसकी बात रामू के दिल में बैठ गई। उस दिन रामू देर तक सोचता रहा। “अगर पाने के लिए देना जरूरी है… तो मैं क्या दे सकता हूँ?” दो दिन तक वह यही सोचता रहा। तीसरे दिन वह बस स्टैंड के पास बैठा था। तभी उसकी नजर जमीन पर पड़े छोटे-छोटे रंगीन पत्थरों पर पड़ी। रामू के दिमाग में अचानक एक विचार आया। उसने कुछ पत्थर उठाए, उन्हें साफ किया और अपनी जेब में रख लिया। उस दिन जब वह बस में भीख मांगने गया तो उसने एक नया तरीका अपनाया। जब कोई उसे पैसे देता… तो वह बदले में उस व्यक्ति को एक रंगीन पत्थर दे देता। और मुस्कुराकर कहता — “यह मेरी तरफ से आपकी किस्मत का पत्थर है।” लोग यह देखकर मुस्कुराने लगे। कुछ लोगों को यह बात बहुत अच्छी लगी। अब लोग उसे पहले से ज्यादा पैसे देने लगे। धीरे-धीरे रामू रोज नए पत्थर इकट्ठा करने लगा। कुछ दिनों बाद उसने महसूस किया कि लोग उसे भीख नहीं दे रहे… बल्कि उन पत्थरों को खरीद रहे हैं। रामू ने थोड़ा पैसा जमा किया और बाजार से रंगीन मोती और सुंदर पत्थर खरीद लिए। अब वह उन्हें छोटे-छोटे पैकेट में बेचने लगा। लोग बस में उससे कहते — “भाई… एक भाग्य वाला पत्थर देना।” रामू खुश होने लगा। कुछ महीनों बाद उसने बस स्टैंड के पास एक छोटी सी दुकान लगा ली। अब वह पत्थर, मोती और छोटे सजावटी सामान बेचने लगा। धीरे-धीरे उसकी दुकान चल पड़ी। लोग दूर-दूर से उसकी दुकान पर आने लगे। और देखते ही देखते रामू एक सफल छोटा व्यापारी बन गया। एक दिन बस स्टैंड पर उसे वही बुजुर्ग आदमी फिर से दिखाई दिया। रामू तुरंत उसके पास गया और बोला — “नमस्ते साहब… क्या आपने मुझे पहचाना?” बुजुर्ग आदमी ने ध्यान से देखा लेकिन पहचान नहीं पाया। रामू मुस्कुराया और बोला — “मैं वही लड़का हूँ जो कभी बस में भीख मांगता था।” बुजुर्ग आदमी हैरान रह गया। रामू बोला — “साहब… उस दिन आपकी एक बात ने मेरी जिंदगी बदल दी थी।” “आपने कहा था कि पाने के लिए देना जरूरी है… और मैंने वही नियम अपनाया।” रामू ने अपनी दुकान की तरफ इशारा किया। “आज मैं भीख नहीं मांगता… मैं लोगों को चीजें देता हूँ और बदले में पैसे कमाता हूँ।” बुजुर्ग आदमी मुस्कुराया और बोला — “देखा… जब इंसान अपनी सोच बदल लेता है तो उसकी किस्मत भी बदल जाती है।” [संगीत] दोस्तों, इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि — अगर हम अपनी सोच बदल लें… और लोगों को कुछ देने की आदत डाल लें… तो हमारी जिंदगी भी बदल सकती है। क्योंकि इस दुनिया का सबसे बड़ा नियम है — “देने वाला ही पाने का हकदार बनता है।”