कभी कभी ज़िंदगी थका देती है… दिल बोलता है बस, अब और नहीं। पर वहीं पर असली खेल शुरू होता है। हर आँसू, हर दर्द, तुम्हें कमज़ोर नहीं बना रहा… वो तुम्हें तैयार कर रहा है। तू टूटा नहीं है, तू बस बदल रहा है, और बदलाव हमेशा दर्द देता है। लोग पूछेंगे — "कहाँ था तू?" तू मुस्कुराना… कहना — "खुद को ढूँढने गया था… अब लौट आया हूँ।" आज जो तू महसूस कर रहा है ना, वो तेरी ताकत है। मत दबा उसे, मत भाग उससे — बस महसूस कर, उठ, और चल फिर से… धीरे सही, मगर रुके बिना। क्योंकि दुनिया उसी को सलाम करती है जो गिरकर भी कहता है — "मेरा वक़्त आएगा… और इस बार मैं चमक के रहूँगा।"