एक आदमी पर बैंक का 400,000 का कर्ज था। निराश होकर उसने नदी में कूदकर अपनी जान देने का फैसला किया। लेकिन वह डूबा नहीं। बहते-बहते वह शहर के बीच एक छोटे से द्वीप पर पहुंच गया। हालाँकि वह मरना चाहता था, फिर भी उसकी जीने की प्रवृत्ति उसे बचने की कोशिश करने पर मजबूर कर रही थी। वह पुल के खंभे पर चढ़ने की कोशिश करता रहा, लेकिन सफल नहीं हुआ, और उसे तैरना भी नहीं आता था। कई बार असफल होने के बाद उसने फांसी लगाकर मरने का सोचा। लेकिन तभी उसके पेट में दर्द हुआ और वह जल्दी से झाड़ियों की तरफ भागा। वहीं उसे लाल रंग की कुछ बेरी दिखाई दी। उसने एक खाई, और उसका मीठा स्वाद उसे अपने बचपन की याद दिला गया। वह अचानक रोने लगा। कुछ देर बाद उसने फैसला किया कि वह इस द्वीप पर जीने की कोशिश करेगा। उसने जंगली मशरूम खाकर पेट भरा और लकड़ियों को रगड़कर आग जलाने की कोशिश की। लेकिन हाथों में छाले पड़ गए और आग नहीं जली। फिर उसने किनारे पर पड़ा कचरा इकट्ठा करना शुरू किया और एक टूटी हुई डक बोट को अपना घर बना लिया। धीरे-धीरे वह इस जीवन का आदी हो गया। जब भी कोई जहाज गुजरता, वह छिप जाता ताकि कोई उसे देख न सके। एक दिन उसे फ्राइड नूडल्स का पैकेट मिला, जिसके अंदर मसाले का पैकेट अभी भी बंद था। तस्वीर देखकर उसे गर्म नूडल्स खाने की बहुत इच्छा हुई। तभी उसने नाव पर पक्षियों की बीट देखी और सोचा कि इसमें बीज हो सकते हैं। उसने जमीन साफ की, बीट को मिट्टी में डाला और एक पुतला बनाकर खेत तैयार किया। तीन महीने बाद बीज अंकुरित हो गए और उसकी जिंदगी में उम्मीद लौट आई। शरद ऋतु तक फसल तैयार हो गई। उसने मक्के को पीसकर आटा बनाया, पानी मिलाकर आटा गूंथा और बोतल से बेलकर नूडल्स काटे। नूडल्स पकाने के बाद उसने महीनों से बचाकर रखा मसाले का पैकेट खोला। कटोरा उठाकर जैसे ही उसने पहला कौर खाया, उसकी आंखों से आँसू निकल पड़े।