हैरान हूं कि कुछ भी ना मांगू कभी [संगीत] मैं जो तुम मेरे हो ऐसा हो क्यों कि लगता है हासिल सभी है जो तुम मेरे हो [संगीत] जो तुम मेरे हो तो मैं कुछ नहीं मांगू दुनिया से और तुम हो ही नहीं तो मैं जीना नहीं चाहूं दुनिया में और नजरों में मेरे एक जहां है जहां तू और मैं अब साथ है और वहां कोई नहीं तू और मैं ही है और आओगे ऐसे आओगे तेरी मेरी क्याय राहे यूं जुड़ी है और राहों में ही जो तुम आए कभी हम तो प्यार से ही मर जाएंगे और आओगे ऐसे आओगे तेरी मेरी क्याय राह उजड़ी है और राहों में ही जो तुम आए नहीं हम तो फिर भी तुम्हे ही जान जो तुम मेरे हो तो मैं कुछ नहीं मांगू दुनिया [प्रशंसा] [संगीत] से पूछे तू कि तुझ में मैं क्या देखता हूं जब चारों तरफ आज कितने ही सारे नजारे हैं जाने ना तू खुद को यूं ना जाने क्यों नजरों से मेरी यहां देखो ना खुद को जरा देखो ना देखो ना जुल्फों से कैसे जुल्फों से तेरी छुपती प्यारी प्यारी सी मुस्कान है और नजर झुकी और नजरें अठी तो मैं क्या ही करूं बरबाद मैं तेरे होठों को तेरे होठों को जिनसे रखती मेरे प्यारे प्यारे नाम है और दिल का तेरे और दिल का तेरे अब मैं क्या ही कहूं क्या बात है और हां देखो यहां कैसे दो दिलों की यह बारात है पर क्या खुला आसमा या फिर लाई यहां जोरों से बरसात है चाहे हो छाए भी बादल तो चाहे फिर भी तुम्हें क्या पता तुमको मांगू ना कुछ और जो तुम रे हो
